भदोही: सार्वजनिक संपत्ति को विरूपित कर रहे अवैध विज्ञापन, विद्युत विभाग और प्रशासन मौन।।

भदोही। जनपद के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में सरकारी संपत्तियों पर अवैध रूप से विज्ञापन चस्पा करने और पेंटिंग करने का धंधा धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। विशेष रूप से विद्युत विभाग के खंभों (बिजली के पोल) को निजी शिक्षण संस्थानों और व्यावसायिक फर्मों ने अपना प्रचार माध्यम बना लिया है। यह न केवल नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि सरकारी संपत्ति को भी विरूपित कर रहा है।
नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां
विद्युत सुरक्षा नियमों और ‘उत्तर प्रदेश सार्वजनिक संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम’ के तहत सरकारी संपत्तियों पर बिना अनुमति विज्ञापन लगाना या पेंटिंग करना दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद, जनपद के दुल्हीपुर, पाली, सारीपुर और आसपास के क्षेत्रों में दर्जनों बिजली के खंभों पर निजी स्कूलों के 'प्रवेश प्रारंभ' के विज्ञापन और व्यावसायिक सेवाओं के मोबाइल नंबर पेंट किए गए हैं।
प्रमुख संस्थान घेरे में
क्षेत्र में किए गए सर्वेक्षण और जुटाए गए साक्ष्यों के अनुसार, विजडम विंग्स पब्लिक स्कूल (सारीपुर), जे.डी. ग्रेटर पब्लिक स्कूल (पाली), एस.आर. ग्लोबल स्कूल (गणेशराय पुर), ए.एस. कॉन्वेंट स्कूल (दुल्हीपुर), और शिव शकुंतला एकेडमी जैसे बड़े संस्थानों ने बिजली के खंभों को विज्ञापनों से पाट दिया है।
इतना ही नहीं, टैंक सफाई जैसी निजी सेवाएं और राजनीतिक प्रचार के पोस्टर भी इन खंभों पर अवैध रूप से लगाए गए हैं।
खतरों को दे रहे निमंत्रण
बिजली के खंभों पर पोस्टर चिपकाने या बार-बार पेंटिंग करने से खंभों की पहचान संख्या छिप जाती है, जिससे तकनीकी खराबी के समय कर्मचारियों को पोल की पहचान करने में समस्या होती है। साथ ही, बारिश के मौसम में इन विज्ञापनों के कारण खंभों पर करंट उतरने या शॉर्ट सर्किट होने की स्थिति में बड़ी दुर्घटना की संभावना बनी रहती है।
प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि इन विज्ञापनों पर संस्थानों के नाम और मोबाइल नंबर स्पष्ट रूप से अंकित हैं, फिर भी विद्युत विभाग और स्थानीय प्रशासन ने अब तक इन पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की है। इससे संचालकों के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि इन संस्थानों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और मुकदमा दर्ज हो, तभी सरकारी संपत्तियों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
विधिक कार्यवाही की मांग
जागरूक समाजसेवियों ने इस प्रकरण को लेकर आईजीआरएस पोर्टल और अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर तत्काल कार्यवाही की मांग की है। मांग की गई है कि सभी अवैध विज्ञापनों को हटवाया जाए और संबंधित मोबाइल नंबरों के आधार पर संचालकों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जुर्माना वसूला जाए।

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