गाजियाबाद: 'स्मार्ट सिटी' के दावों को मुंह चिढ़ाते खुले नाले और अवैध विज्ञापनों का अंबार।।
गाजियाबाद (विशेष संवाददाता): विकास की अंधी दौड़ में गाजियाबाद के कुछ इलाकों की जमीनी हकीकत प्रशासन के दावों की पोल खोल रही है। डुंडाहेड़ा अंडरपास के पास की स्थिति इसका जीता-जागता प्रमाण है। यहाँ न केवल नालों की सफाई व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है, बल्कि खुले नाले और अवैध विज्ञापनों के ढेर ने राहगीरों की जान को भी जोखिम में डाल दिया है।
गंदगी का अंबार, बीमारियों को दावत
डुंडाहेड़ा अंडरपास के समीप स्थित नाले लंबे समय से कचरे, प्लास्टिक और मलबे से पटे पड़े हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि महीनों से नालों की सफाई नहीं हुई है, जिसके कारण गंदा पानी सड़कों पर जमा होने लगा है। इस दूषित वातावरण से संक्रामक बीमारियों (जैसे मलेरिया, डेंगू) के फैलने का खतरा बढ़ गया है। 'स्वच्छ भारत अभियान' के नारों के बीच इस तरह की लापरवाही नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न चिह्न खड़ी करती है।
खुले नाले: मौत को खुला आमंत्रण
इस क्षेत्र में नालों के ऊपर कोई कवर या ढक्कन नहीं है। अंधेरे के समय यहाँ से गुजरने वाले दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों के लिए ये नाले 'डेथ ट्रैप' (मौत का जाल) साबित हो रहे हैं। पूर्व में भी कई मवेशी और राहगीर इन खुले नालों में गिरकर चोटिल हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है।
विज्ञापनों ने बिगाड़ा शहर का स्वरूप
अंडरपास ब्रिज के ऊपर बेतरतीब ढंग से लगाए गए विज्ञापनों और पोस्टरों ने शहर के सौंदर्य को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। नियमानुसार, किसी भी सार्वजनिक पुल या अंडरपास पर बिना अनुमति विज्ञापन लगाना प्रतिबंधित है, लेकिन यहाँ विज्ञापनों का ऐसा ढेर लगा है कि ब्रिज की संरचना भी नजर नहीं आ रही है। यह विज्ञापन वाहन चालकों का ध्यान भटकाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
सामाजिक संगठनों ने उठाई आवाज
महाकाल एक्सप्रेस फाउंडेशन के अध्यक्ष कन्हैया लाल दुबे ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि प्रशासन की यह अनदेखी बर्दाश्त के बाहर है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नालों की सफाई नहीं हुई और अवैध विज्ञापन नहीं हटाए गए, तो वे इस मामले को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और उच्च अधिकारियों तक ले जाएंगे।
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