खाकी की साख पर सवाल, पेल्हार चौकी के पीछे बचपन का कत्ल

नालासोपारा। केंद्र और राज्य सरकारें भले ही बाल श्रम को जड़ से मिटाने के बड़े-बड़े दावे करें, लेकिन पालघर जनपद के नालासोपारा में जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। यहाँ पेल्हार पुलिस चौकी के ठीक पीछे स्थित एक भोजनालय में मासूम बच्चों से खुलेआम मजदूरी कराई जा रही है। ताज्जुब इस बात का है कि जिस पुलिस पर कानून के संरक्षण की जिम्मेदारी है, उसी की नाक के नीचे बच्चों का भविष्य चूल्हे की आग में झोंका जा रहा है।
पूरा मामला नालासोपारा पूर्व के नालासोपारा फाटा का है। यहाँ भैरुजी भोजनालय नामक प्रतिष्ठान में छोटे बच्चों से होटल के भारी काम कराए जा रहे हैं। स्थानीय जागरूक नागरिकों और वरिष्ठ पत्रकार कन्हैयालाल दुबे ने जब इसका विरोध किया और होटल संचालक दलपत सिंह को कानून का हवाला देते हुए बच्चों को मुक्त करने को कहा, तो उसने इसे पूरी तरह अनसुना कर दिया। आरोपी संचालक के हौसले इतने बुलंद हैं कि उसे न तो स्थानीय पुलिस का डर है और न ही कानून का कोई खौफ।
इस मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह भोजनालय पेल्हार पुलिस चौकी के बिल्कुल पीछे संचालित हो रहा है। ऐसे में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठना लाजमी है कि आखिर चौकी के इतने करीब चल रहे इस अवैध कृत्य पर प्रशासन की नजर क्यों नहीं पड़ी। क्या यह पुलिस की अनदेखी है या फिर होटल संचालक को किसी प्रकार का संरक्षण प्राप्त है।
वरिष्ठ पत्रकार और महाकाल एक्सप्रेस फाउंडेशन के संस्थापक कन्हैयालाल दुबे ने इस अमानवीय कृत्य के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मामले से जुड़े वीडियो और फोटो साक्ष्यों के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, एमबीवीवी पुलिस आयुक्त और पालघर जिलाधिकारी को आधिकारिक शिकायत भेजी है। उन्होंने मांग की है कि होटल पर तत्काल छापेमारी कर बच्चों को रेस्क्यू किया जाए और संचालक के विरुद्ध कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजा जाए।
बचपन के साथ हो रहे इस खिलवाड़ ने प्रशासनिक सतर्कता की पोल खोल दी है। अब क्षेत्र की जनता यह देख रही है कि बच्चों को न्याय दिलाने के लिए उच्च अधिकारी इस संगठित अपराध पर क्या कदम उठाते हैं।