मुंबई उपनगरीय रेलवे: एक तरफ 'विकसित भारत' की बुलेट ट्रेन का सपना, दूसरी तरफ रेलवे बाउंड्री के भीतर अवैध 'टिन शेड' का साम्राज्य
कन्हैयालाल दुबे
मुंबई::भारत आज विश्व पटल पर 'विकसित भारत' के संकल्प के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। एक तरफ देश में बुलेट ट्रेन और वंदे भारत जैसी अत्याधुनिक परियोजनाओं से रेलवे की कायापलट हो रही है, तो दूसरी तरफ आर्थिक राजधानी मुंबई में एक बेहद चिंताजनक विरोधाभास देखने को मिल रहा है। अंधेरी से लेकर दहिसर तक (जोगेश्वरी, गोरेगांव, मलाड, कांदिवली और बोरीवली स्टेशनों के मध्य) रेलवे की आधिकारिक सुरक्षा सीमा (बाउंड्री वॉल) के भीतर अवैध रूप से बने टिन शेड (पत्रे के शेड) न केवल सुरक्षा प्रोटोकॉल को ठेंगा दिखा रहे हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रशासनिक कार्यक्षमता और छवि पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सुरक्षा के लिए 'टाइम बम' बने अवैध शेड
रेलवे पटरियों के अत्यंत निकट बने ये टिन शेड किसी 'टाइम बम' से कम नहीं हैं। यह अतिक्रमण जमीन की खुदाई से कहीं अधिक सूक्ष्म लेकिन घातक है। तेज गति से गुजरने वाली ट्रेनों से होने वाले कंपन के बीच, इन अनियंत्रित संरचनाओं का रेल लाइन के इतने करीब होना सीधे तौर पर रेल परिचालन और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है। स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के कारण ये अवैध निर्माण न केवल सरकारी भूमि पर काबिज हैं, बल्कि ये अवांछित लोगों के जमावड़े का केंद्र भी बनते जा रहे हैं, जिससे सुरक्षा के दृष्टिकोण से बड़ा जोखिम पैदा हो गया है।
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
विकास के मार्ग में 'अतिक्रमण' की बेड़ियाँ
एक ओर सरकार बुनियादी ढांचे के विकास पर अरबों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर हो रही यह अव्यवस्था विकास के दावों को खोखला साबित कर रही है। जब हम 'विकसित भारत' की बात करते हैं, तो उसमें अनुशासन और परिसंपत्तियों का संरक्षण सर्वोपरि होता है। मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली उपनगरीय रेलवे के किनारों पर पसरा यह अवैध अतिक्रमण देश की उस छवि को धूमिल करता है, जिसे भारत वैश्विक स्तर पर प्रोजेक्ट करना चाहता है।
कानूनी शिकंजा: प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
रेलवे प्रशासन का इस ओर से आंखें मूंदे रहना प्रशासनिक अक्षमता का प्रमाण है। कानूनन, रेलवे की सीमा के भीतर अनधिकृत निर्माण करना एक दंडनीय अपराध है:
रेलवे अधिनियम, 1989 (धारा 147): रेलवे की संपत्ति में अनाधिकृत प्रवेश और निर्माण कार्य को अंजाम देने पर कठोर कारावास और आर्थिक दंड का प्रावधान है।
सार्वजनिक संपत्ति का संरक्षण: सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करना कानूनन अपराध है।
कर्तव्य में लापरवाही (Dereliction of Duty): यदि जिम्मेदार अधिकारी अपनी कार्यसीमा में हो रहे इस अतिक्रमण को रोकने में विफल रहते हैं, तो उन पर विभागीय कार्रवाई और जवाबदेही तय करना अनिवार्य है
समय रहते निर्णायक कार्यवाही की दरकार
समय बीतने के साथ इन अतिक्रमणों को हटाना और भी जटिल होता जाएगा, जिसका खामियाजा अंततः सरकार और आम जनता दोनों को भुगतना पड़ेगा। वक्त आ गया है कि रेलवे प्रशासन कागजी खानापूर्ति बंद कर 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाए। मुंबई रेल विकास निगम (MRVC) और स्थानीय नगर निकाय के साथ समन्वय कर एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाए, जो रेलवे बाउंड्री के भीतर के इन शेडों को तत्काल ध्वस्त कर सके।
बुलेट ट्रेन की गति और आधुनिकता को यदि बचाए रखना है, तो पटरियों के किनारे मौजूद इस 'अवैध संस्कृति' को जड़ से उखाड़ना होगा। भारत की साख और मुंबईकरों की सुरक्षा, दोनों ही रेलवे प्रशासन की सख्त और निर्णायक कार्यवाही पर टिकी हैं।
संपादकीय नोट / डिस्क्लेमर
"यह रिपोर्ट स्थानीय निवासियों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं और रेलवे की आधिकारिक सीमाओं के उल्लंघन के तथ्यों पर आधारित है। 'महाकाल एक्सप्रेस' का उद्देश्य जन-हित में प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने की दिशा में शासन का ध्यान आकर्षित करना है। हमारा किसी भी व्यक्ति या समुदाय के प्रति द्वेष नहीं है, बल्कि यह खबर 'विकसित भारत' के संकल्प के तहत सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा और रेल सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। हम संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा करते हैं कि वे इस मामले का तत्काल संज्ञान लें और वस्तुस्थिति की जांच कर उचित कार्यवाही सुनिश्चित करें।"
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