वसई रेलवे स्टेशन पर लोहमार्ग पुलिस की मुहिम: साइबर ठगी और 'डिजिटल अरेस्ट' के खिलाफ यात्रियों को किया गया जागरूक

सहायक पुलिस निरीक्षक सुभाष राठौड़ के नेतृत्व में चला विशेष अभियान; 'निर्भय पालघर' की टीम भी रही उपस्थित
वसई (संवाददाता: सुभाष मयेकर):
 पालघर जिले के व्यस्ततम वसई रेलवे स्टेशन पर ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए एक सघन जनजागरूकता अभियान चलाया गया। यह अभियान वसई लोहमार्ग पुलिस के सहायक पुलिस निरीक्षक (एपीआई) सुभाष गोपाल राठौड़ के नेतृत्व में पुलिस टीम द्वारा सफलतापूर्वक संचालित किया गया। इस सामाजिक मुहिम में 'निर्भय पालघर' समाचार पत्र की टीम ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई, जिसमें मुख्य रूप से संपादक अनिल विश्वकर्मा, सह-संपादक कन्हैयालाल दुबे और उपसंपादक सुभाष मयेकर उपस्थित रहे। संयुक्त टीम ने स्टेशन परिसर, टिकट खिड़की और प्लेटफार्म क्षेत्रों में उपस्थित होकर यात्रियों से सीधा संवाद स्थापित किया और सूचनात्मक प्रचार पत्रक (पैम्फलेट) वितरित किए।
'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं: पुलिस
अभियान के दौरान सहायक पुलिस निरीक्षक सुभाष राठौड़ ने दैनिक यात्रियों को संबोधित करते हुए हाल के दिनों में तेजी से बढ़ रहे 'डिजिटल अरेस्ट' के फर्जीवाड़े को लेकर आगाह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई विधिक प्रावधान ही नहीं है। कोई भी असली पुलिसकर्मी या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ करके रुपयों की मांग नहीं करती है। यात्रियों को सलाह दी गई कि यदि ऐसा कोई धमकी भरा कॉल आए तो तनिक भी न घबराएं, फोन तुरंत काटें, शांत रहें और अधिकृत हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
फुट ओवरब्रिज पर लाउडस्पीकर से गूंजी चेतावनी
स्टेशन पर आवागमन करने वाले हजारों मुसाफिरों तक सुरक्षा संदेश पहुंचाने के लिए पुलिस टीम ने फुट ओवरब्रिज और सीढ़ियों पर लाउडस्पीकर व मेगाफोन के माध्यम से निरंतर उद्घोषणाएं कीं। 'सायबर सुरक्षिततेकडे एक पाऊल' शीर्षक वाले बड़े बैनरों और सूचना पत्रकों को प्रदर्शित करते हुए पुलिस टीम ने भीड़भाड़ के बीच यात्रियों को सीधे जागरूक किया और यात्रा के दौरान डिजिटल सतर्कता बरतने की सलाह दी।
हेल्पलाइन 1930, MRM और GRM प्रणाली की दी जानकारी
जागरूकता पत्रक के माध्यम से यात्रियों को बताया गया कि यदि कोई साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो बिना समय गंवाए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करे या cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए। इसके साथ ही ठगी गई धनराशि वापस दिलाने में मददगार 'मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल' (MRM) और जांच के दौरान फ्रीज हुए बैंक खातों के समाधान हेतु 'ग्रीवेंस रिड्रेसल मॉड्यूल' (GRM) की कार्यप्रणाली के बारे में भी विस्तार से समझाया गया।
'रुको, जांचो, फिर भरोसा करो' का मूलमंत्र
अभियान के दौरान यात्रियों से अनजान लिंक पर क्लिक न करने, संदिग्ध क्यूआर कोड स्कैन न करने, ओटीपी साझा न करने और 'टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन' (2FA) लागू रखने का आह्वान किया गया। पुलिस ने "थांबा • तपासा • मगच विश्वास ठेवा" (रुको • जांचो • फिर भरोसा करो) का नियम अपनाने की अपील की। सहायक पुलिस निरीक्षक सुभाष राठौड़, उनकी पुलिस टीम और 'निर्भय पालघर' समाचार पत्र के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस पहल का स्थानीय नागरिकों व दैनिक यात्रियों ने व्यापक स्वागत किया।