'प्रवासी जागरण' के तीन गौरवशाली वर्ष: हर प्रवासी के दिल की आवाज़
संवाददाता कन्हैयालाल दुबे
नई दिल्ली(मुंबई): एक छोटे से सपने के साथ शुरू हुआ 'प्रवासी जागरण' समाचार पत्र आज अपनी स्थापना के तीन सफल वर्ष पूरे कर चुका है। यह मात्र एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि देश से दूर रहने वाले हर प्रवासी भारतीय के दिल की आवाज़ बन गया है। एम. ए. मिश्रा, मालिक, मुद्रक, प्रकाशक और संपादक के नेतृत्व में, 'प्रवासी जागरण' ने न केवल विचारों की क्रांति जलाई है, बल्कि हर प्रवासी को अपनी जड़ों, संस्कृति और मिट्टी से जोड़े रखने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
एक स्वप्न से क्रांति तक का सफ़र
'प्रवासी जागरण' की यात्रा एक विनम्र शुरुआत से हुई थी, लेकिन इसका लक्ष्य हमेशा बड़ा रहा – प्रवासी भारतीयों को सूचना और अपनत्व से जोड़ना। आज यह विचारों की एक सशक्त धारा बन चुका है, जो देश और विदेश में समान रूप से प्रसारित हो रही है। यह समाचार पत्र उन सभी प्रवासियों के लिए एक सेतु का काम करता है, जो भौगोलिक दूरी के बावजूद अपनी सांस्कृतिक पहचान और भारतीय मूल्यों से जुड़े रहना चाहते हैं। इसने प्रवासी समुदाय में अपनी संस्कृति, संस्कारों और मातृभूमि से रिश्तों को और गहरा करने में अहम भूमिका निभाई है।
विश्वास और बेबाकी का प्रतीक
पिछले तीन वर्षों में, 'प्रवासी जागरण' हर प्रवासी के सुख-दुख का साथी बना है। इसने न केवल महत्वपूर्ण खबरों को कवर किया है, बल्कि प्रवासी समुदाय से संबंधित हर मुद्दे को बेबाकी और ईमानदारी से उठाया है। 'प्रवासी जागरण' ने विश्वास की एक मजबूत नींव बनाई है, जिस पर हर पाठक और शुभचिंतक का अटूट भरोसा टिका है। यह कभी विचारों की अग्नि जलाने वाला माध्यम बना, तो कभी भावनाओं को स्वर देने वाला मंच। न्याय के पथ पर अग्रसर होते हुए, इसने हर उस आवाज़ को बुलंद किया, जिसे सुनने की आवश्यकता थी।
चुनौतियों से आगे, प्रेम और समर्थन से सराबोर
इस यात्रा में चुनौतियाँ बेशक आईं, लेकिन 'प्रवासी जागरण' के हौसले हमेशा अडिग रहे। कलम कभी रुकी नहीं, और पत्रकारिता के उच्च मानदंडों का पालन करते हुए यह अनवरत आगे बढ़ता रहा। यह सफलता पाठकों, विज्ञापनदाताओं और शुभचिंतकों के अथाह प्रेम और विश्वास का प्रत्यक्ष परिणाम है। इसी अटूट समर्थन ने 'प्रवासी जागरण' को अपनी यात्रा में कभी झुकने नहीं दिया और इसे लगातार प्रगति के पथ पर अग्रसर किया।
'प्रवासी जागरण' के तीन वर्ष पूरे होने के इस गौरवशाली अवसर पर, एम. ए. मिश्रा और उनकी पूरी टीम, सभी पाठकों, विज्ञापनदाताओं, शुभचिंतकों और समाचार पत्र से जुड़े हर शख्स को हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई देती है। यह विश्वास है कि आने वाले वर्षों में भी 'प्रवासी जागरण' इसी निष्ठा और समर्पण के साथ प्रवासी समुदाय की सेवा करता रहेगा
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