पहलगाम का शोक डोंबिवली में गहराया: आतंकी हमले में मारे गए तीनों का अंतिम संस्कार, उमड़ा जनसैलाब

रिपोर्ट कन्हैयालाल दुबे 

मुख्यमंत्री फडणवीस सहित हजारों नम आंखों ने दी अंतिम विदाई, परिजनों ने आतंकवादियों के लिए कड़ी सजा की मांग की

डोंबिवली गमगीन: संजय लेले, हेमंत जोशी और अतुल मोने को हजारों नम आंखों ने दी अंतिम विदाई

ठाणे, 24 अप्रैल। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायराना आतंकवादी हमले ने महाराष्ट्र के ठाणे जिले के डोंबिवली में शोक की गहरी लहर पैदा कर दी। बुधवार को इस हमले में जान गंवाने वाले डोंबिवली के तीन निवासियों - संजय लेले (50), हेमंत जोशी (45) और अतुल मोने (43) - का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में शोकाकुल लोग शामिल हुए। अपने प्रियजनों को खोने के गम में डूबे शहर ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि, उमड़ा जनसैलाब
तीनों मृतकों के पार्थिव शरीर बुधवार सुबह मुंबई लाए गए। इसके बाद, दोपहर में उन्हें डोंबिवली स्थित भागशाला मैदान में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहुंचकर मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता रवींद्र चव्हाण और स्थानीय शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे भी मौजूद थे, जिन्होंने शोक संतप्त परिवारों को सांत्वना दी।
शाम ढलते ही, लगभग नौ बजे, तीनों पार्थिव शरीरों को फूलों से सजे वाहनों में रखकर शिव मंदिर रोड स्थित श्मशान घाट की ओर ले जाया गया। इस दौरान, सड़कों पर हजारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े, जो अपने परिचितों और शहर के इन दुर्भाग्यपूर्ण पीड़ितों को अंतिम सम्मान देने के लिए एकत्र हुए थे। माहौल अत्यंत गमगीन था, और हवा में शोक और निराशा घुली हुई थी।

नवी मुंबई में भी शोक, फंसे हुए पर्यटकों की चिंता
इसी आतंकी हमले में जान गंवाने वाले नवी मुंबई के दिलीप देसले (64) का अंतिम संस्कार भी बुधवार को उनके पैतृक गांव न्यू पनवेल के पोडी में किया गया। इस दुखद अवसर पर महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने भी उपस्थित होकर शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
इस बीच, ठाणे जिला प्रशासन ने देर रात एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी कर बताया कि जिले के 156 पर्यटक वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में विभिन्न स्थानों पर फंसे हुए हैं। इस खबर ने पहले से ही शोकग्रस्त परिवारों और जिले में चिंता की एक नई लहर पैदा कर दी है, क्योंकि लोग अपने प्रियजनों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। प्रशासन ने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि इन फंसे हुए पर्यटकों को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

परिजनों ने मांगा इंसाफ
अतुल मोने के पार्थिव शरीर के दिन में शहर पहुंचने पर, उनके एक करीबी रिश्तेदार राजश्री अकुल ने मीडिया से बात करते हुए अपने गहरे दुख और गुस्से का इजहार किया। उन्होंने कहा, "हमारे आंसू सूख गए हैं। इस दुख को व्यक्त करने के लिए हमारे पास शब्द नहीं हैं। हम सरकार से बस यही पुरजोर मांग करते हैं कि इन आतंकवादियों को अधिकतम और जल्द से जल्द सजा दी जाए। हम इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई या देरी बर्दाश्त नहीं करेंगे।" उन्होंने आगे बताया कि उनके परिवार को इस भयावह हमले की जानकारी सबसे पहले टेलीविजन समाचार चैनलों के माध्यम से मिली थी, और बाद में पुलिस नियंत्रण कक्ष से आए एक आधिकारिक फोन कॉल ने मृतकों में अतुल मोने के शामिल होने की दुखद पुष्टि की।

पहलगाम में हुए इस नृशंस आतंकवादी हमले ने न केवल मृतकों के परिवारों को बल्कि पूरे महाराष्ट्र को गहरे सदमे में डाल दिया है। अंतिम संस्कार में उमड़ी भारी भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि इस दुख की घड़ी में पूरा शहर और राज्य शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ा है। लोगों की आंखों में गुस्सा और दुख साफ झलक रहा था, और हर कोई यही उम्मीद कर रहा था कि सरकार इस कायराना हरकत के दोषियों को जल्द से जल्द न्याय के कटघरे में लाएगी और पीड़ितों के परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

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