शिक्षा में लापरवाही: पालघर जिले में अवैध विद्यालयों का जाल, किसकी है जिम्मेदारी?
संवाददाता कन्हैयालाल दुबे
अवैध निर्माणों में शिक्षा का गोरखधंधा, जिम्मेदार मौन
पालघर जिले में शिक्षा के नाम पर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जिले भर में बड़ी संख्या में ऐसे विद्यालय संचालित हो रहे हैं जो या तो अवैध निर्माणों में चल रहे हैं या जिनके पास शिक्षा विभाग की वैध मान्यता नहीं है। इन अनियमित विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता को ताक पर रखा जा रहा है, और हैरानी की बात यह है कि संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदे हुए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पालघर जिले के वसई, विरार, नालासोपारा, बोईसर और पालघर तालुका में ऐसे अनेक विद्यालय धड़ल्ले से चल रहे हैं जिनके पास या तो भवन निर्माण की अनुमति नहीं है या फिर वे कृषि भूमि या अन्य गैर-शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए आरक्षित भूमि पर बने हुए हैं। इन अवैध निर्माणों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। संकरी सीढ़ियां, अग्निशमन यंत्रों की कमी और असुरक्षित विद्युत वायरिंग बच्चों के लिए हर पल खतरे की घंटी बजा रहे हैं।
शिक्षा विभाग की निष्क्रियता और मनपा की मेहरबानी पर सवाल
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि शिक्षा विभाग को इन अवैध विद्यालयों की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के चलते इन विद्यालयों का संचालन निर्बाध रूप से जारी है। यह न केवल शिक्षा के नियमों का सरासर उल्लंघन है, बल्कि मासूम बच्चों के जीवन के साथ भी खिलवाड़ है।
मनपा और स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। अवैध निर्माणों पर लगाम लगाने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी इन निकायों की है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इन अवैध विद्यालयों के खिलाफ कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। क्या कुछ वित्तीय लाभ के चलते इन अवैध संस्थाओं को संरक्षण दिया जा रहा है? यह सवाल अभिभावकों और जागरूक नागरिकों के मन में घूम रहा है।
अभिभावकों की मजबूरी और बच्चों के भविष्य पर खतरा
अभिभावक मजबूरी में या जानकारी के अभाव में अपने बच्चों को इन असुरक्षित विद्यालयों में भेजने को विवश हैं। उन्हें यह डर सताता रहता है कि कहीं कोई अप्रिय घटना न घट जाए। बच्चों के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से कठोर कार्रवाई की मांग
यह समय है कि पालघर जिले के जिलाधिकारी, शिक्षा विभाग और वसई विरार शहर महानगरपालिका सहित सभी संबंधित अधिकारी अपनी गहरी नींद से जागें। उन्हें तत्काल एक संयुक्त अभियान चलाकर जिले में चल रहे सभी अवैध विद्यालयों की पहचान करनी चाहिए और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालय संचालकों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए।
यह सुनिश्चित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि पालघर जिले के हर बच्चे को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। लापरवाही और मिलीभगत का यह खेल अब बंद होना चाहिए, ताकि हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
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