ठाणे में रिश्वतखोरी का बढ़ता जाल: अब भूमि अभिलेख हस्तांतरण में लेखपाल पर उगाही का आरोप
संवाददाता कन्हैयालाल दुबे
तहसीलदार कार्यालय में कार्यरत तलाठी पर 50 हजार की रिश्वत मांगने का मामला दर्ज
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में भ्रष्टाचार के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। ताजा घटनाक्रम में, भूमि अभिलेखों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को सुगम बनाने के एवज में एक सरकारी अधिकारी द्वारा रिश्वत की मांग का मामला सामने आया है। ठाणे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की पुलिस उप अधीक्षक माधवी राजेकुंभर ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि ठाणे तहसीलदार के अधिकार क्षेत्र में कार्यरत तलाठी (लेखपाल) सिद्धि संतोष पाटकर के विरुद्ध एक हाउसिंग सोसायटी के नाम पर भूमि अभिलेख स्थानांतरित करने के लिए कथित तौर पर 50,000 रुपये की रिश्वत मांगने का मामला दर्ज किया गया है।
आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद कार्य लंबित, रिश्वत की मांग
पुलिस उप अधीक्षक माधवी राजेकुंभर ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि शिकायतकर्ता ने एक भूखंड को एक सोसायटी के नाम पर विधिवत स्थानांतरित करने के लिए तहसील कार्यालय में अपना आवेदन प्रस्तुत किया था। सभी आवश्यक और वैध दस्तावेज जमा करने के बावजूद, संबंधित कार्य को जानबूझकर लंबित रखा गया। आरोप है कि इसी दौरान, आरोपी अधिकारी सिद्धि संतोष पाटकर ने उक्त आवेदन को स्वीकृति प्रदान करने के लिए शिकायतकर्ता से अनुचित रूप से रिश्वत की मांग की।
भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज, गिरफ्तारी शेष
पुलिस उप अधीक्षक ने आगे बताया कि आरोपी तलाठी सिद्धि संतोष पाटकर के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत सोमवार को विधिवत मामला दर्ज कर लिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यद्यपि रिश्वत की मांग की गई थी, परन्तु आरोपी द्वारा किसी भी प्रकार की धन राशि स्वीकार नहीं की गई है। इस मामले में अभी तक किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुलिस द्वारा आगे की गहन जांच जारी है।
पूर्व में भी दो सरकारी कर्मचारी रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार
यह उल्लेखनीय है कि ठाणे जिले में रिश्वतखोरी के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। हाल ही में, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने ठाणे में स्थित सरकारी एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना (ITDP) के दो कर्मचारियों को रिश्वत लेने के आरोप में सफलतापूर्वक गिरफ्तार किया था। वरिष्ठ लिपिक हरीश मराठे (47) और कनिष्ठ लिपिक हेमंत किरपाण (39) नामक इन कर्मचारियों को ठाणे में एक शिकायत दर्ज होने के पश्चात पकड़ा गया था। एसीबी के एक अधिकारी के अनुसार, इन दोनों ने शिकायतकर्ता की माताजी के चिकित्सा व्यय के भुगतान के लिए कथित तौर पर रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, प्रारंभिक मांग 23 हजार रुपये थी, लेकिन बाद में वे 15 हजार रुपये की राशि पर सहमत हो गए थे। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि ठाणे क्षेत्र में भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या बनी हुई है, जिसके उन्मूलन के लिए कठोर और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।
टिप्पणियाँ