नालासोपारा पूर्व: मनपा के आदेश को ठेंगा, फेरीवालों का राज, जनता त्रस्त
पुलिस और मनपा की नाक के नीचे अतिक्रमण का बोलबाला, कार्यवाही सिर्फ दिखावा?
संवाददाता कन्हैयालाल दुबे
1. मनपा के आदेश की धज्जियाँ: नालासोपारा पूर्व में अतिक्रमण का बोलबाला
नालासोपारा पूर्व, पालघर जिले का एक ऐसा क्षेत्र बन गया है जहाँ फेरीवालों का अनियंत्रित अतिक्रमण आम नागरिकों के दैनिक जीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। वसई विरार शहर महानगरपालिका (वीवीएमसी) द्वारा सार्वजनिक स्थानों से 100 मीटर की दूरी तक फेरी लगाने पर स्पष्ट रूप से बोर्ड के माध्यम से जारी की गई है, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। नालासोपारा पूर्व की मुख्य सड़कें और फुटपाथ फेरीवालों की अस्थायी दुकानों से इस कदर अटे पड़े हैं कि पैदल चलने वालों के लिए तो जगह ही नहीं बची है, वहीं वाहनों की आवाजाही भी बुरी तरह से बाधित हो रही है।
2. मुख्य सड़कों पर कब्जा: तूलिंज पुलिस स्टेशन और टाकी रोड अतिक्रमण के केंद्र
सबसे अधिक चिंताजनक और स्पष्ट अतिक्रमण तूलिंज पुलिस स्टेशन के ठीक सामने आचोले रोड पर देखने को मिलता है। यहाँ लगभग 300 मीटर की लम्बाई में फेरीवालों ने सड़क के किनारों पर अपनी दुकानें सजा ली हैं। यही हाल टाकी रोड से रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले व्यस्त मार्ग का भी है, जहाँ एक ओर के फुटपाथ पूरी तरह से फेरीवालों के कब्जे में हैं। इस अतिक्रमण के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं और अक्सर यहाँ जाम की स्थिति बनी रहती है।
3. प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल: पुलिस और मनपा कार्यालय के पास भी समस्या अनसुलझी
यह आश्चर्य की बात है कि तूलिंज पुलिस स्टेशन और महानगरपालिका प्रभाग डी का कार्यालय अतिक्रमण वाले क्षेत्रों के पास से कुछ ही मिनटों की दूरी पर स्थित हैं। इसके बावजूद, प्रशासन की ओर से इस समस्या का कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है। स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर गहरा असंतोष है कि प्रशासन इस समस्या को हल करने में इतनी उदासीन क्यों बना हुआ है।
4. कार्रवाई का दिखावा: फेरीवालों को पहले से मिल जाती है सूचना
जब कभी महानगरपालिका की कार्रवाई की खबरें सामने आती भी हैं, तो वह अक्सर महज एक दिखावा साबित होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मनपा की गाड़ियाँ आती तो ज़रूर हैं, लेकिन उनके पहुँचने से पहले ही फेरीवालों को इसकी सूचना मिल जाती है। परिणामस्वरूप, फेरीवाले कुछ समय के लिए इधर-उधर छिप जाते हैं और जैसे ही मनपा की गाड़ियाँ वापस लौटती हैं, वे फिर से अपनी जगह पर काबिज हो जाते हैं।
5. मिलीभगत का आरोप: भ्रष्ट अधिकारियों की शह पर फल-फूल रहा अतिक्रमण
स्थानीय सूत्रों ने बताया कि "महानगरपालिका के कुछ अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका की ओर भी इशारा किया है। उनका आरोप है कि इन अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर और इतने लंबे समय तक अतिक्रमण का जारी रहना संभव नहीं है। ’भ्रष्टाचार' की चर्चा भी आम है, जिसके कारण फेरीवालों को अतिक्रमण करने की खुली छूट मिली हुई है अगर ऐसा नहीं होता तो कोई भी इस तरीके से अतिक्रमण नहीं कर सकता"।
6. यातायात जाम से जनजीवन अस्त-व्यस्त: घंटों का सफर, आपातकालीन सेवाएं भी बाधित
इस अनियंत्रित अतिक्रमण का सबसे अधिक खामियाजा यहाँ के आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। सड़कों पर लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम के कारण न केवल उनका कीमती समय बर्बाद होता है, बल्कि कई बार आवश्यक सेवाओं जैसे एम्बुलेंस और फायरब्रिगेड की गाड़ियाँ भी इस जाम में फँस जाती हैं।
7. नागरिकों को ठोस कार्रवाई की उम्मीद: प्रशासन कब लेगा सुध?
अब नालासोपारा पूर्व के आम जनता यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या महानगरपालिका प्रशासन अंततः इस गंभीर समस्या पर ध्यान देगा और फेरीवालों के इस अनियंत्रित अतिक्रमण से उन्हें मुक्ति दिलाएगा? लोगों को अब ठोस कार्रवाई का इंतजार है, ताकि वे शांति और सुगमता से अपने दैनिक कार्यों को कर सकें।
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