वसई-विरार में अवैध निर्माण चरम पर, आयुक्त और सह आयुक्तों की भूमिका संदिग्ध

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना: 

रिपोर्ट:कन्हैयालाल दुबे

वसई-विरार : वसई-विरार महानगरपालिका क्षेत्र में सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए, अवैध निर्माणकर्ताओं ने पूरे शहर में गैरकानूनी निर्माण का साम्राज्य खड़ा कर लिया है। चिंताजनक बात यह है कि इन गतिविधियों के बीच मनपा आयुक्त अनिल पवार और उनके अधीनस्थ सह आयुक्त मूकदर्शक बने हुए हैं, जबकि प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता ने इस समस्या को और भी गंभीर बना दिया है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, वसई-विरार के हर प्रभाग में बड़े पैमाने पर बिना मंजूरी के निर्माण कार्य जारी हैं, जिनमें न केवल निजी व सरकारी जमीनें बल्कि वन विभाग की संरक्षित जमीनें भी शामिल हैं। इन अवैध निर्माणों को रोकने के बजाय, मनपा प्रशासन की ओर से या तो आंखें मूंदी जा रही हैं या कथित रूप से रिश्वत लेकर इन्हें संरक्षण दिया जा रहा है।

वन भूमि भी असुरक्षित, प्रशासनिक मिलीभगत का आरोप

इन अवैध गतिविधियों में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वन विभाग की बहुमूल्य जमीनों पर भी अतिक्रमण किया जा रहा है। वहां पर्यावरण नियमों को नजरअंदाज करते हुए अवैध निर्माण हो रहे हैं। इसके बावजूद, न तो मनपा आयुक्त और न ही संबंधित सह आयुक्त कोई ठोस कार्रवाई करते नजर आ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि इन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है और भ्रष्टाचार के आरोप भी सामने आए हैं।

बिजली-पानी के कनेक्शन भी नियमों को ताक पर रखकर जारी

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, किसी भी निर्माण को बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं केवल वैध मंजूरी के बाद ही दी जानी चाहिए। लेकिन, वसई-विरार में यह प्रक्रिया भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। अवैध निर्माणों को खुलेआम कनेक्शन दिए जा रहे हैं, जिससे सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंच रहा है और कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

शिकायतों पर भी मौन प्रशासन, नागरिकों में भारी आक्रोश

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे जनता में आक्रोश और अविश्वास का माहौल है। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि जब खुद मनपा आयुक्त और उनके सह आयुक्त ही आंखें मूंद लें, तो नागरिकों को न्याय कौन दिलाएगा?
अब जिलाधिकारी पालघर से उम्मीदें

इन हालातों में अब सभी की नजरें जिलाधिकारी पालघर की ओर टिकी हैं। नागरिकों की मांग है कि इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लिया जाए और मनपा आयुक्त सहित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, अवैध निर्माणकर्ताओं पर शिकंजा कसा जाए और वन विभाग की जमीनों की रक्षा की जाए।
महाकाल एक्सप्रेस का मानना है कि यह स्थिति न केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना है, बल्कि कानून के शासन की नींव को भी हिला रही है। यदि समय रहते इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो न केवल पर्यावरण को गंभीर नुकसान होगा बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और अधिकार भी खतरे में पड़ जाएंगे।

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