वसई विरार में अतिक्रमण का बढ़ता संकट: मनपा की कथित निष्क्रियता और दबंगों के संरक्षण से नागरिक बेहाल, ठोस कार्रवाई का इंतजार

 रिपोर्ट: कन्हैयालाल दुबे

वसई विरार शहर महानगरपालिका का प्रभाग समिति 'ई' क्षेत्र, विशेषकर सन साइन इलाका, इन दिनों अतिक्रमण के एक गहरे संकट से जूझ रहा है। मुख्य सड़कें और फुटपाथ अवैध फेरीवालों के कब्ज़े में हैं, जिससे आम नागरिकों का चलना-फिरना दूभर हो गया है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को संकरी जगहों से होकर गुजरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों ने कई बार महानगरपालिका अधिकारियों से इसकी शिकायत की है, लेकिन आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ दिखावा किया जाता है, जिससे नागरिकों में निराशा और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
कार्रवाई से पहले 'अलर्ट'! क्या अंदरूनी सांठगांठ है?
स्थानीय नागरिकों और कुछ अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि जब कभी महानगरपालिका की अतिक्रमण विरोधी टीम इलाके में आने वाली होती है, तो इसकी सूचना पहले ही अवैध फेरीवालों तक पहुंच जाती है। यह सूचना कैसे और किसके माध्यम से पहुंचती है, यह एक बड़ा सवाल है जो मनपा प्रशासन की कार्यशैली पर संदेह पैदा करता है। सूचना मिलते ही, फेरीवाले तुरंत अपनी दुकानें और ठेले समेटकर आसपास की दुकानों के पीछे, गलियों में या अन्य सुरक्षित स्थानों पर छिप जाते हैं।
जब मनपा के कर्मचारी मौके पर पहुंचते हैं, तो उन्हें सड़कें अपेक्षाकृत खाली मिलती हैं। ऐसे में, वे कुछेक 'बलि के बकरे' ढूंढते हैं - या तो किसी का मापतौल का कांटा जब्त कर लेते हैं या फिर थोड़ा-बहुत सामान उठाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा देते हैं। हैरानी की बात यह है कि सड़कों पर जमे मुख्य अतिक्रमण को अनदेखा कर दिया जाता है और अधिकारी बिना कोई ठोस कार्रवाई किए ही वापस लौट जाते हैं। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है, जिससे अवैध फेरीवालों के हौसले बुलंद हैं और नागरिकों की परेशानियां जस की तस बनी हुई हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह संदिग्ध प्रक्रिया सिर्फ कनिष्ठ स्तर के कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं है। यहां तक कि सूर्यभान पाटिल जैसे जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति में भी इंचार्ज स्तर के कर्मचारियों द्वारा इसी तरह का 'दिखावटी दौरा' आयोजित किया जाता है। यह पैटर्न सवाल खड़ा करता है कि क्या मनपा प्रशासन के भीतर कुछ ऐसे तत्व मौजूद हैं जो जानबूझकर अतिक्रमण को बढ़ावा दे रहे हैं या फिर कार्रवाई के प्रति उदासीन हैं?


कानूनी शिकंजा क्यों नहीं? दबंगों का बढ़ता प्रभाव
स्थानीय निवासियों का मानना है कि इस समस्या का स्थायी समाधान तभी निकल सकता है जब महानगरपालिका प्रशासन अवैध फेरीवालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करे। उनका कहना है कि इन अतिक्रमणकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (First Information Report - FIR) दर्ज कराई जानी चाहिए और उन्हें कानूनी रूप से दंडित किया जाना चाहिए। हालांकि, ऐसा होता हुआ दिखाई नहीं देता। इसके पीछे एक बड़ा कारण कार्रवाई से पहले सूचना का लीक होना तो है ही, साथ ही इलाके के कुछ दबंगों का संरक्षण भी बताया जा रहा है।
एक सनसनीखेज जानकारी के अनुसार, कुछ दिनों पहले जब मनपा अधिकारियों ने सन साइन इलाके में सड़कों से फेरीवालों को हटाने का साहस दिखाया था, तो आसपास के दबंगों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। इन दबंगों के प्रभाव के कारण मनपा अधिकारी बेबस नजर आए और उस दिन के बाद से इलाके में अतिक्रमण के खिलाफ कोई भी प्रभावी अभियान नहीं चलाया गया है। यह घटना दर्शाती है कि अवैध फेरीवालों को न केवल प्रशासनिक निष्क्रियता का लाभ मिल रहा है, बल्कि उन्हें कुछ असामाजिक तत्वों का भी संरक्षण प्राप्त है, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई है।

इस गंभीर मामले की शिकायत वसई विरार शहर मनपा आयुक्त अनिल पवार और सहायक आयुक्त अश्विनी मोरे तक भी पहुंचाई गई है। अब देखना यह है कि क्या इन उच्च अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव आता है या फिर नागरिकों को अतिक्रमण की इस समस्या से जूझना पड़ता रहेगा। सहायक आयुक्त अश्विनी मोरे से इस घटना और अतिक्रमण की समस्या पर उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे सीधा संपर्क नहीं हो सका। हालांकि, व्हाट्सएप के माध्यम से शिकायत उन तक पहुंचा दी गई है। वहीं, खबर लिखे जाने तक सूर्यभान पाटिल से भी फोन पर संपर्क कर कथित मारपीट की घटना के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश जारी है।
  मनपा की गाड़ी खड़ी है और ठेले पर दुकान चला रहा है 

वसई विरार के सन साइन इलाके में अतिक्रमण का यह संकट न केवल यातायात व्यवस्था को बाधित कर रहा है, बल्कि आम नागरिकों के दैनिक जीवन को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महानगरपालिका प्रशासन इस गंभीर स्थिति को कब समझता है और कब इन अवैध अतिक्रमणकारियों और उन्हें संरक्षण देने वाले तत्वों के खिलाफ ठोस और निर्णायक कार्रवाई करता है। नागरिकों को अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर बदलाव चाहिए। क्या मनपा प्रशासन अपनी निष्क्रियता की चादर ओढ़कर सोता रहेगा या फिर जागेगा और नागरिकों को इस अतिक्रमण के जाल से मुक्ति दिलाएगा? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब आने वाला समय ही देगा।

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