जल जीवन मिशन की धीमी गति: 100 से अधिक परियोजनाएं समय सीमा के बाद भी अधूरी, लोगों को शुद्ध पानी का इंतजार
संवाददाता कन्हैयालाल दुबे
परियोजनाओं में देरी से गर्मी में पेयजल संकट गहराया
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना था, कार्यदायी संस्थाओं और ठेकेदारों की सुस्त कार्यशैली के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है। तय समय सीमा से लगभग डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी 100 से अधिक महत्वपूर्ण परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं, जिससे भीषण गर्मी में लोगों को शुद्ध पानी मिलने की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं। इस लेटलतीफी के चलते करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आम जनता को इस योजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
बढ़ती आबादी और दूषित जल की समस्या
गौरतलब है कि क्षेत्र में बढ़ती जनसंख्या के साथ-साथ पानी की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। पारंपरिक जल स्रोत जैसे हैंडपंप लगाए तो गए हैं, लेकिन कई इलाकों में पानी में आर्सेनिक, आयरन और फ्लोराइड जैसे हानिकारक तत्वों की मात्रा अधिक पाई जा रही है। इस दूषित पानी के सेवन से लोगों में तरह-तरह की बीमारियां फैल रही हैं, जिससे शुद्ध पेयजल की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।
मिशन का उद्देश्य और कार्यान्वयन में लापरवाही
इसी गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने अगस्त 2019 में जल जीवन मिशन की शुरुआत की थी। इस मिशन के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में आबादी के अनुसार पेयजल टंकियां स्थापित कर पाइपलाइन के माध्यम से हर घर तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। पहले चरण में वर्ष 2021 में कुल 82 परियोजनाओं को स्वीकृति मिली थी। तीन चरणों में अब तक 988 गांवों का चयन इस योजना के अंतर्गत किया गया। हालांकि, कार्यदायी संस्थाओं वेलस्पन और जी इंफ्रा की कथित उदासीनता और ठेकेदारों द्वारा बरती गई लापरवाही के कारण इन परियोजनाओं की प्रगति संतोषजनक नहीं रही है।
अधूरे कार्य: कहीं पाइपलाइन नहीं, कहीं टंकी का अभाव
योजना के कार्यान्वयन में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं सामने आई हैं। कई स्थानों पर पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन पेयजल टंकियों का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हो सका है। वहीं, कुछ जगहों पर टंकियां बनकर तैयार हैं, लेकिन घरों तक पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन का नेटवर्क नहीं बिछाया गया है। इस तरह की अधूरी तैयारियों के चलते 100 से अधिक परियोजनाएं निर्धारित समय सीमा, यानी जनवरी 2024 तक भी पूरी नहीं हो सकी हैं। अब लगभग 15 महीने बीत जाने के बाद भी इन परियोजनाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
इस विस्तृत खबर से आपको परियोजनाओं की स्थिति और लोगों की परेशानी का बेहतर अंदाजा लग पाएगा।
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