भदोही के गौरव 'काशी नरेश महाविद्यालय' को मिला राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा, विकास की नई राहें खुलीं

भदोही। जनपद के शैक्षिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। प्रदेश के पहले राजकीय महाविद्यालय, काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय (KNPG) को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा राज्य विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता दिए जाने से क्षेत्र के छात्रों और अभिभावकों में हर्ष की लहर है।
'विश्वविद्यालय बनाओ संघर्ष समिति' के संस्थापक शिवम शुक्ला ने इसे भदोही के भविष्य के लिए एक 'महाप्रसाद' बताते हुए शासन का आभार व्यक्त किया है।
शैक्षिक सत्र 2026-27 से शुरू होगा नया स्वरूप
विश्वविद्यालय के रूप में इसके संचालन की तैयारियाँ तेज हो गई हैं। आगामी शैक्षिक सत्र 2026-27 से यह पूर्णतः क्रियाशील हो जाएगा। शासन द्वारा कुलपति, रजिस्ट्रार और उप-रजिस्ट्रार सहित छह महत्वपूर्ण पदों को स्वीकृति दे दी गई है। अगले एक सप्ताह के भीतर उच्चाधिकारियों के यहाँ पहुँचने की संभावना है। इसके साथ ही जनपद के अन्य सभी डिग्री कॉलेजों को भी इसी विश्वविद्यालय से संबद्ध (Affiliate) किया जाएगा, जिससे प्रशासनिक और शैक्षिक कार्यों में सुगमता आएगी।
ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने की मांग
खबर के केंद्र में महाविद्यालय की वह ऐतिहासिक इमारत भी है जो महाराज काशी नरेश की स्मृति और उनके वैभव को दर्शाती है। वर्तमान में जर्जर हो रही इस धरोहर को लेकर शिवम शुक्ला ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सुझाव दिया कि नई बिल्डिंग्स के निर्माण के साथ-साथ पुरानी इमारतों को गिराने के बजाय उन्हें एक भव्य 'संग्रहालय' (Museum) का रूप दिया जाना चाहिए। इसमें राजा साहब के सिद्धांतों, उनकी दानशीलता और उनके संघर्षों का वर्णन हो, ताकि आने वाली पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सके।
पुस्तकालय में दफन है अमूल्य ज्ञान का खजाना
महाविद्यालय का पुस्तकालय अपनी दुर्लभ पुस्तकों के लिए विख्यात है। यहाँ ऐसी प्राचीन और महत्वपूर्ण पुस्तकें मौजूद हैं जो इंटरनेट (Net) पर भी उपलब्ध नहीं हैं। इनमें से कई पुस्तकें कॉपर और एल्युमीनियम की ब्रांडिंग वाली हैं, जिन्हें उस दौर में विदेशों से मंगाया गया था। वर्तमान में उचित रखरखाव के अभाव में इन अमूल्य ग्रंथों के नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा है। बुद्धिजीवियों ने मांग की है कि इस 'रिच लाइब्रेरी' को संरक्षित कर इसे आधुनिक डिजिटल स्वरूप प्रदान किया जाए।
पर्यटन और राजस्व का बनेगा बड़ा केंद्र
भदोही को काशी और प्रयाग के मध्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इसे पर्यटन सर्किट से जोड़ने की वकालत की गई है। यदि इसे सीतामढ़ी और प्रयाग के साथ जोड़कर विकसित किया जाए, तो यह न केवल शिक्षा बल्कि पर्यटन के क्षेत्र में भी प्रदेश को बड़ा राजस्व प्रदान करेगा। ₹21 करोड़ के शुरुआती बजट को सूक्ष्म बताते हुए शासन से और अधिक निवेश की मांग की गई है ताकि शिक्षा को 'सस्ती, अच्छी और आधुनिक' बनाया जा सके।
युवाओं और जनप्रतिनिधियों से अपील
साक्षात्कार के दौरान युवाओं को संदेश दिया गया कि जनपद के विकास का उत्तरदायित्व उन्हीं के कंधों पर है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सांसद से अपील की गई है कि वे पुरातत्व विभाग (ASI) को पत्र लिखकर इस ऐतिहासिक परिसर के संरक्षण की दिशा में कदम उठाएं, ताकि भदोही का यह 'ब्रांड' राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान पुनः स्थापित कर सके।

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