गोपीगंज कोतवाली में जल संकट: 'आदर्श' थाने में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग, प्यास बुझाने को बाहर जाने की मजबूरी
संवाददाता कन्हैयालाल दुबे
भदोही (गोपीगंज): गर्मी का पारा चढ़ते ही भदोही जनपद की आदर्श कोतवाली गोपीगंज में पानी की भारी किल्लत खड़ी हो गई है। कहने को तो यह 'आदर्श' कोतवाली है, लेकिन यहाँ की हकीकत यह है कि परिसर में लगा सरकारी नल (हैंडपंप) महीनों से खराब पड़ा है। प्यास से व्याकुल फरियादी और राहगीर पानी की एक बूंद के लिए भी तरस रहे हैं।
क्या है जमीनी हकीकत?
राष्ट्रीय राजमार्ग 19 (NH-19) पर स्थित इस कोतवाली में प्रतिदिन सैकड़ों लोग अपनी समस्याएं लेकर आते हैं। गर्मी के इस मौसम में जब लोगों को ठंडे पानी की सख्त जरूरत है, तब थाने का नल सफेद हाथी बना खड़ा है। प्यास लगने पर शिकायतकर्ताओं को मजबूरन थाने से बाहर जाकर पानी की तलाश करनी पड़ती है।
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ आम जनता और निचले स्तर के पुलिसकर्मी पानी के लिए भटक रहे हैं, वहीं सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों के लिए अंदर अलग से पानी की व्यवस्था की गई है। एक तैनात सिपाही ने बताया कि यह समस्या कई महीनों से बनी हुई है, लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
जिम्मेदारों की चुप्पी
संवाददाता कन्हैयालाल दुबे ने जब इस समस्या को लेकर थाना प्रभारी शैलेश कुमार राय से दोपहर लगभग 03:30 बजे थाने पर मिलने की कोशिश की, तो उनसे मुलाकात नहीं हो पाई। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकारी तंत्र इतना लापरवाह हो गया है कि जनता की बुनियादी जरूरतों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है?
इन अधिकारियों की बनती है जवाबदेही
* थाना प्रभारी (गोपीगंज): थाने की व्यवस्थाओं को सुचारू रखना उनकी पहली जिम्मेदारी है।
* क्षेत्राधिकारी (CO) गोपीगंज: क्या उनके निरीक्षण में यह समस्या कभी सामने नहीं आई?
* नगर पालिका/संबंधित विभाग: खराब नलों की मरम्मत सुनिश्चित करना।
पुलिस अधीक्षक (SP) भदोही से जनहित में मांग
इस गंभीर समस्या को देखते हुए पुलिस अधीक्षक भदोही को तत्काल कड़े निर्देश जारी करने चाहिए ताकि:
* गोपीगंज कोतवाली सहित जनपद के सभी थानों और चौकियों पर पानी की समुचित व्यवस्था हो।
* खराब पड़े नलों और वाटर कूलर्स को तत्काल ठीक कराया जाए।
* थानों में आने वाले फरियादियों और धूप में ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों को गर्मी के प्रकोप से बचाने के लिए शीतल जल (प्याऊ) का प्रबंध किया जाए।
अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद प्रशासन जागता है या जनता ऐसे ही 'आदर्श' व्यवस्था की मार झेलती रहेगी।
टिप्पणियाँ