खाकी की आड़ में 'डिजिटल उगाही' का खेल: सुरियावां पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
भदोही। जनपद के सुरियावां थाना क्षेत्र के अंतर्गत पट्टी बेजाव गांव में पुलिस के नाम पर धन उगाही की कोशिश का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। तकनीक का सहारा लेकर निर्दोष ग्रामीणों को भयभीत करने वाले इस 'डिजिटल सिंडिकेट' ने पुलिस प्रशासन की चौकसी पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
पुराने नोटिस का डर दिखाकर वसूली का प्रयास
जानकारी के अनुसार, पट्टी बेजाव निवासी पीड़ित विपिन को मोबाइल नंबर +91 63895 36359 से एक कॉल प्राप्त हुई। फोन करने वाले अज्ञात व्यक्ति ने स्वयं को सुरियावां थाने का सिपाही बताते हुए पुराने नोटिस और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया। आरोपी ने मामले के रफा-दफा करने के नाम पर अवैध धनराशि की मांग की। हालांकि, पीड़ित की सूझबूझ और सजगता के कारण यह ठगी सफल नहीं हो सकी, लेकिन इस घटना ने क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
न्याय की गुहार: "डिजिटल अरेस्ट" की साजिश से सहमा पीड़ित
पीड़ित विपिन ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि 10 दिसंबर को उसे थाना प्रभारी के नाम पर 'डिजिटल अरेस्ट' करने की धमकी देकर मानसिक दबाव बनाया गया था। पीड़ित ने कहा, "मैंने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक (SP), क्षेत्राधिकारी (CO) और थाना प्रभारी को लिखित साक्ष्यों के साथ अवगत कराया और IGRS पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की, लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी अपराधी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।"
जांच के भंवर में फंसा न्याय: CDR रिपोर्ट की प्रतीक्षा
इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संदेहास्पद मोबाइल नंबर की सीडीआर (CDR) और कैफ (CAF) रिपोर्ट मांगी गई है। तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस साजिश के पीछे कोई अंतरराज्यीय साइबर अपराधी है या फिर पीड़ित को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए विपक्षी पक्ष द्वारा रचा गया कोई षड्यंत्र।
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
यह मामला केवल एक व्यक्ति की प्रताड़ना का नहीं, बल्कि पुलिस की छवि धूमिल करने का भी है। यदि समय रहते पुलिस के नाम पर वसूली करने वाले इन तत्वों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आम जनता का खाकी पर से विश्वास डगमगा सकता है। फिलहाल, क्षेत्र के लोग पुलिस की अगली कार्रवाई और तकनीकी जांच के परिणामों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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