पालघर में सरकारी ज़मीन पर 'भूमाफिया' का कब्ज़ा: प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल, जांच की मांग
पालघर, 16 जून 2025: पालघर जिले के वसई तालुका में सरकारी भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण का एक गंभीर मामला सामने आया है। पत्रकार कन्हैयालाल दुबे ने जिला अधिकारी (कलेक्टर) पालघर सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को एक विस्तृत शिकायत पत्र लिखकर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई और अवैध निर्माणों को हटाने की मांग की है। दुबे ने अपने पत्र में मौजे पेल्हार गाँव के सर्वे नंबर 282 की लगभग 15 एकड़ सरकारी भूमि पर "भूमाफियाओं द्वारा संगठित अवैध कब्जे" का आरोप लगाया है। यह भी आरोप लगाया गया है कि इसमें कई प्रशासनिक विभागों और जनप्रतिनिधियों की "उदासीनता और निष्क्रियता" शामिल हो सकती है।
सार्वजनिक संपत्ति पर संगठित अतिक्रमण के आरोप
पत्रकार कन्हैयालाल दुबे के अनुसार, सर्वे नंबर 282 में वन भूमि (वुड लैंड प्रोटेक्ट फॉरेस्ट), सरकारी राजस्व खाते की जमीनें, और भूमिहीन, शेतमजूर व स्वतंत्रता सेनानियों के कल्याण हेतु आरक्षित भूखंड शामिल हैं। ये भूखंड राज्य की जनता के हित और भविष्य के लिए सुरक्षित रखे गए थे, जिनका उपयोग पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक न्याय और गरीबों के उत्थान के लिए होना था। हालांकि, दुबे ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि "बेखौफ आपराधिक तत्व, भ्रष्टाचार के गठजोड़ के दम पर, विशालकाय अवैध निर्माण कर रहे हैं और हमारी सार्वजनिक धरोहर को निगल रहे हैं।"
प्रशासनिक उदासीनता पर गंभीर सवाल
शिकायत पत्र में विभिन्न प्रशासनिक विभागों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। दुबे ने जिला कलेक्टर कार्यालय, वन विभाग (मांडवी वन परिक्षेत्र), राजस्व विभाग (उपविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, मंडल अधिकारी और तलाठी), वसई विरार शहर महानगर पालिका, और पुलिस प्रशासन (मीरा भाईंदर वसई विरार के पुलिस आयुक्त) पर "आश्चर्यजनक निष्क्रियता और उदासीनता" का आरोप लगाया है।
* जिला कलेक्टर कार्यालय: आरोप है कि उनके प्रत्यक्ष क्षेत्राधिकार में होते हुए भी सरकारी जमीनों पर यह अतिक्रमण बेरोकटोक जारी है।
* वन विभाग: मांडवी वन परिक्षेत्र के अधिकारियों की वर्तमान उदासीनता पर सवाल उठाते हुए इसे सीधे तौर पर भूमाफियाओं को संरक्षण देने के समान बताया गया है।
* राजस्व विभाग: उपविभागीय अधिकारी (SDM), तहसीलदार, मंडल अधिकारी और तलाठी पर "घोर लापरवाही" का आरोप लगाया गया है, यह कहते हुए कि ऐसा लगता है मानो महाराष्ट्र शासन की जमीनों को दान में देने की खुली छूट दे दी गई हो।
* वसई विरार शहर महानगर पालिका: आयुक्त व प्रशासक महोदय सहित उनके अधीन कार्यरत अधिकारियों पर इस अवैध साम्राज्य को अनदेखा करने का आरोप है। पत्र में कहा गया है कि उनके उपायुक्त, सहायक आयुक्त, इंजीनियर और तोड़क दस्ता केवल छोटे और कमजोर लोगों पर कार्रवाई तक सीमित हैं, जबकि भूमाफियाओं को संरक्षण मिल रहा है।
* पुलिस प्रशासन: मीरा भाईंदर वसई विरार के पुलिस आयुक्त और उनके अधिकारियों/कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई है, जिसमें अवैध निर्माणों से 'धन उगाही' की शिकायतों और 300 से अधिक एम.आर.टी.पी. नोटिसों पर प्रभावी कानूनी कार्रवाई न होने का उल्लेख है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी आरोप
पत्र में पालघर लोकसभा के माननीय सांसद महोदय और बोईसर विधानसभा के माननीय विधायक महोदय जैसे जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। दुबे ने आरोप लगाया है कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि, जिन पर सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और लोक कल्याण का भार है, इस गंभीर अतिक्रमण पर मौन धारण किए हुए हैं। उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि "चुनाव जीतने के बाद उनका ध्यान जनता के सरोकारों से हट गया है।"
महत्वपूर्ण नोट: यह पुनः स्पष्ट करना आवश्यक है कि ये सभी आरोप स्थानीय नागरिकों द्वारा लगाए गए हैं, जिनकी गहन जाँच और पुष्टि होना बाकी है। आरोपों की सत्यता न्यायिक प्रक्रिया या सक्षम प्राधिकारी द्वारा की गई जांच के बाद ही स्थापित हो सकती है।
कठोर कार्रवाई की मांग
कन्हैयालाल दुबे ने अपने पत्र में सभी संबंधित अधिकारियों से विनम्र परंतु दृढ़ निवेदन किया है कि वे अपने पद की गरिमा और संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए, अविलंब इस विशाल सरकारी भूखंड पर हुए और हो रहे अतिक्रमण को कठोरतापूर्वक निष्कासित करें। साथ ही, उन्होंने इन आपराधिक तत्वों और इसमें संलिप्त किसी भी सरकारी अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता के तहत सख्त आपराधिक मुकदमा दर्ज कर, उन्हें दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में लाने की मांग की है।
उन्होंने इस "राष्ट्रविरोधी कृत्य" को रोकने और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करने के लिए अतिशीघ्र, निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की है।
शिकायत पत्र की प्रतियां निम्नलिखित अधिकारियों को भी प्रेषित की गई हैं, ताकि वे तत्काल संज्ञान लेकर कठोर कार्रवाई कर सकें:
* मा. उपविभागीय अधिकारी/प्रान्त अधिकारी (SDM) महोदय, वसई (प.)
* मा. तहसीलदार महोदय, वसई गाँव, वसई (प.)
* मा. मुख्य वनसंरक्षक प्रादेशिक महोदय, ठाणे
* मा. उपवन संरक्षक अधिकारी महोदय, डहाणु
* मा. आयुक्त व प्रशासक महोदय, वसई विरार शहर महानगर पालिका, विरार (प.)
* मा. पोलिस आयुक्त, मीरा भाईंदर वसई-विरार शहर, मीरा रोड (पू.)
* मा. सांसद महोदय, पालघर लोकसभा
* मा. विधायक महोदय, बोईसर विधानसभा
इस गंभीर मामले पर अधिकारियों की प्रतिक्रिया और आगामी कार्रवाई का इंतजार है।
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