गोंडा में प्रधानमंत्री आवास योजना घोटाला: तत्कालीन प्रधान, सचिव सहित 17 पर FIR दर्ज, DM की सख्ती से हड़कंप
संवाददाता कन्हैयालाल दुबे
गोंडा,१८ जून २०२५: प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत वित्तीय अनियमितता और शासकीय धन के दुरुपयोग के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। गोंडा जिले के पंडरी कृपाल विकासखंड की ग्राम पंचायत दरियापुर हरदोपट्टी में हुए इस घोटाले के संबंध में जिलाधिकारी नेहा शर्मा के कड़े निर्देश पर तत्कालीन ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी और 15 अपात्र लाभार्थियों सहित कुल 17 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इस कार्रवाई ने जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति का स्पष्ट संदेश दिया है।
यह मामला तब सामने आया जब जिला विकास अधिकारी कार्यालय के पत्र संख्या 815 दिनांक 13 जून 2025 और खंड विकास अधिकारी, पंडरी कृपाल के पत्र संख्या 298 दिनांक 16 जून 2025 के आधार पर ग्राम पंचायत अधिकारी सरिता शुक्ला द्वारा थाना इटियाथोक में तहरीर दी गई। शिकायत में बताया गया कि वर्ष 2018-19 से 2021-22 के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत कुल 15 अपात्र लाभार्थियों के खातों में 6 लाख 80 हजार रुपये की धनराशि अनुचित तरीके से स्थानांतरित की गई।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कुछ अपात्र लाभार्थियों ने पहली किस्त प्राप्त करने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं किया, जबकि एक लाभार्थी ने तो पूरी धनराशि प्राप्त करने के बावजूद आवास का निर्माण नहीं कराया। इस पूरी अनियमितता में तत्कालीन ग्राम प्रधान श्रीमती उषा देवी, तत्कालीन सचिव अजीत गुप्ता (ग्राम पंचायत अधिकारी) और संबंधित विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों की मिलीभगत की पुष्टि हुई है।
डीएम के निर्देश पर हुई जांच, घोटाले का पर्दाफाश
जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने इस प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लिया था। उनके निर्देश पर हुई जांच में यह स्पष्ट हुआ कि शासन द्वारा स्वीकृत धनराशि का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है। डीएम ने इसे गंभीर वित्तीय गड़बड़ी मानते हुए न केवल शासकीय धन की वसूली, बल्कि दोषियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई के भी निर्देश दिए थे। इसी अनुपालन में थाना इटियाथोक पुलिस ने सभी 15 अपात्र लाभार्थियों के साथ-साथ तत्कालीन ग्राम प्रधान और सचिव के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर लिया है।
जिनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है, उनमें शामिल हैं:
* लाभार्थी: श्यामपता पत्नी रामचरन, लक्ष्मी देवी पत्नी केशवराम, अनीता पत्नी सुनील कुमार, ममता देवी पत्नी विनोद कुमार, सुरेश कुमार पुत्र महादेव, शानपती पत्नी श्रीनिवास, गुलशन बानो पत्नी मो. रिजवान, सरोजनी देवी पत्नी रामपाल, जगदम्बा प्रसाद पुत्र ओमप्रकाश, रमेश कुमार पुत्र महादेव प्रसाद, सुमन पत्नी भगौती प्रसाद, पवन कुमार पुत्र माधव, रामसरन पुत्र गोविन्द प्रसाद, राजकुमारी पत्नी राजकिशोर, विद्याधर पुत्र अमरिका प्रसाद।
* अन्य: उषा देवी (तत्कालीन प्रधान) और अजीत गुप्ता (तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी)।
इस मामले की विवेचना अब पुलिस द्वारा की जा रही है, और जल्द ही आगे की विधिक कार्रवाई अपेक्षित है।
प्रशासन की सख्ती बनी नज़ीर, पारदर्शिता पर जोर
जिलाधिकारी नेहा शर्मा की इस त्वरित और निर्णायक कार्रवाई को जनहित योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन की दिशा में एक अहम और अनुकरणीय कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी योजनाओं में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। प्रशासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि जिले में ऐसे अन्य मामलों की भी पुनः जांच की जाएगी, और यदि कहीं और गड़बड़ियां पाई जाती हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भी एफआईआर और वसूली की कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना उन सभी के लिए एक चेतावनी है जो सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करने का प्रयास करते हैं। जिला प्रशासन गोंडा वित्तीय अनुशासन और जन कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शा रहा है।
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