दुलहीपुर सहित नौ गांवों के किसान होंगे 'मालमाल': भदोही में आधुनिक खेती से समृद्धि का संकल्प
कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां में 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' का आयोजन; प्राकृतिक खेती, मृदा जांच और नवीनतम तकनीकों पर दिया गया जोर
भदोही, उत्तर प्रदेश: अब खेती को घाटे का सौदा नहीं, बल्कि समृद्धि का मार्ग बनाने का समय आ गया है। इसी संकल्प के साथ, भदोही के कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां में बुधवार को 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' के तहत एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पहल में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी और कृषि विभाग भदोही ने संयुक्त रूप से किसानों को लाभान्वित करने पर विशेष बल दिया। जनपद के चकसुंदरपुर, नत्थईपुर, उमरपुर, भिदिउरा, पाली, कसिदहां, घाटमपुर, दुलहीपुर तथा छत्रशाहपुर सहित नौ गांवों के किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और आधुनिक कृषि तकनीकों को सीखने में उत्साह दिखाया।
खरीफ फसलों और जैविक खेती पर विशेष मार्गदर्शन
कार्यक्रम में किसानों को खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों जैसे धान, बाजरा, उड़द, मूंग, तिल और विभिन्न सब्जियों की उन्नत खेती कैसे करें, इस बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों ने किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने का आह्वान किया, जो न केवल भूमि के स्वास्थ्य के लिए बेहतर है बल्कि उपज की गुणवत्ता और किसानों की आय में भी वृद्धि करती है। इसके अतिरिक्त, मृदा जांच (मिट्टी परीक्षण), कृषि मशीनीकरण, नवीनतम सिंचाई तकनीकें और पौधों की सुरक्षा पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई, जिससे किसान अपनी खेती को और अधिक वैज्ञानिक तरीके से कर सकें।
आत्मनिर्भरता की राह: प्रशिक्षण और सरकारी योजनाएँ
केंद्र के वरिष्ठ विज्ञानी सह हेड डॉ. विश्वेंदु द्विवेदी ने बताया कि डॉ. भुवनेश्वरी और किरण कुमार ने एकीकृत नाशीजीबी प्रबंधन (Integrated Pest Management) और बीज उत्पादन तकनीकी पर गहन मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने किसानों से कृषि विज्ञान केंद्र से रोजगारपरक प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। साथ ही, केंद्र सरकार और कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कृषि कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई, ताकि किसान इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकें।
विशेषज्ञों द्वारा ग्रामीण स्तर पर गहन मार्गदर्शन
कार्यक्रम में विभिन्न गांवों के लिए अलग-अलग विशेषज्ञों की टीमें भेजी गईं:
* चकसुंदरपुर, नत्थईपुर, उमरपुर के गांवों में वैज्ञानिक डॉ. एन त्रिपाठी, डॉ. मोहम्मद शाहिद, डॉ. आरपी चौधरी और योगेश कुमार ने धान में लगने वाले कंडवा रोग, मृदा में उर्वरक का संतुलित प्रयोग, प्राकृतिक खेती के आयाम और पशुपालन से जुड़ी समस्याओं पर किसानों को बहुमूल्य जानकारी दी।
* भिदिउरा, पाली, कसिदहां गांवों में डॉ. बीके सिंह, डॉ. मंजूनाथ, डॉ. एके चतुर्वेदी और ताराचंद बैरवा ने उन्नतशील सब्जियों की प्रजातियों और उनके पोषक तत्व प्रबंधन के साथ-साथ सब्जियों को रोगों से बचाने के तरीकों पर विशेष मार्गदर्शन प्रदान किया।
किसानों में इस कार्यक्रम को लेकर अप्रतिम उत्साह देखा गया। उन्होंने महसूस किया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही तमाम योजनाओं और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अब किसानी भी लाभ का सौदा बन सकती है, जिससे वे सचमुच 'मालमाल' हो सकते हैं।
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