मीरा-भाईंदर में क्लस्टर डेवलपमेंट योजना के खिलाफ भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता का मोर्चा, आयुक्त को सौंपा ज्ञापन

धोखाधड़ी वाली इमारतों के मुद्दे और 24 आरक्षण रद्द करने की मांग; कांग्रेस का भी समर्थन, बड़े आंदोलन की चेतावनी
ठाणे: मीरा-भाईंदर शहर में लागू की गई क्लस्टर डेवलपमेंट योजना के खिलाफ भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने एक बार फिर पुरजोर विरोध दर्ज कराया है। गुरुवार को, इस योजना से प्रभावित सोसायटी पदाधिकारियों के एक शिष्टमंडल के साथ, विधायक मेहता ने मीरा-भाईंदर महानगरपालिका (MBMC) के आयुक्त व प्रशासक राधाबिनौद शर्मा को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में मेहता ने क्लस्टर योजना से संबंधित सात प्रमुख मुद्दों को उठाते हुए, धोकादायक इमारतों की बिजली-पानी की आपूर्ति बाधित न करने, उनके पुनर्विकास की अनुमति देने, और क्लस्टर योजना में समाविष्ट किए गए 24 आरक्षणों को रद्द करने की मांग की है।
क्लस्टर योजना पर बढ़ता राजनीतिक और जन विरोध
मीरा-भाईंदर शहर में क्लस्टर योजना लागू करने के लिए मई 2023 में नोटिफिकेशन जारी की गई थी। उस समय भी विधायक मेहता ने इस योजना को शहर के हित में नहीं बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया था। मेहता ने मनपा आयुक्त शर्मा को आगाह किया है कि यदि लोगों की इन ठोस मांगों को नहीं माना गया तो लोग सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे, और भाजपा इस आंदोलन में उनके साथ खड़ी होगी। हाल ही में, मीरा-भाईंदर जिला कांग्रेस ने भी क्लस्टर योजना को रद्द करने की मांग कर इस विरोध को और मजबूती प्रदान की है।
विधायक मेहता द्वारा उठाए गए 7 प्रमुख मुद्दे
विधायक नरेंद्र मेहता ने आयुक्त व प्रशासक शर्मा को सौंपे गए ज्ञापन में निम्नलिखित सात महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर किया है:
 * संरचनात्मक ऑडिट और मरम्मत के बाद निवास की अनुमति: धोकादायक घोषित इमारतों के निवासियों को उनकी मांग के अनुसार संरचनात्मक ऑडिट कराने का अवसर दिया जाना चाहिए, और यदि वे मांग करें तो, मरम्मत के बाद भी उन्हें उस इमारत में रहने की अनुमति मिलनी चाहिए।
 * बिजली और पानी की आपूर्ति का संरक्षण: यदि कोई धोकादायक इमारत वास्तव में जर्जर हो गई है, तो उसके बिजली और पानी के कनेक्शन तब तक नहीं काटे जाने चाहिए जब तक कि इमारत पूरी तरह से खाली न हो जाए।
 * क्लस्टर के 24 आरक्षण रद्द हों और व्यक्तिगत पुनर्निर्माण की अनुमति: मीरा-भाईंदर महानगरपालिका ने शहर में क्लस्टर योजना के तहत 24 ज़ोन में आरक्षण की घोषणा की है। इसके कारण मनपा अधिकांश खतरनाक इमारतों को व्यक्तिगत रूप से पुनर्निर्माण करने की अनुमति नहीं दे रही है, जिससे उनका पुनर्विकास बाधित हो रहा है और निवासी बेघर हो रहे हैं। अतः, क्लस्टर की इन 24 योजनाओं को रद्द किया जाना चाहिए और खतरनाक इमारतों को व्यक्तिगत रूप से पुनर्निर्माण करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
 * विस्थापन से पहले पुनर्वास: मनपा द्वारा खतरनाक इमारत को गिराने से पहले, इमारत के निवासियों को उनके फ्लैटों के अनुसार पुनर्वास के लिए 1BHK या 2BHK फ्लैट प्रदान किए जाने चाहिए।
 * छोटे भूखंडों पर पूर्ण एफएसआई की अनुमति: जो इमारतें क्लस्टर योजना के आरक्षण से बाहर हैं, लेकिन 9 मीटर या उससे कम चौड़ाई वाली सड़कों पर बनी हैं, ऐसी इमारतों के पुनर्निर्माण के लिए मनपा पूर्ण एफएसआई (मौजूदा क्षेत्र और इंसेंटिव) को मंजूरी नहीं देती है, जिससे उनका पुनर्विकास नहीं हो पाता है। चूंकि अन्य शहरों के मनपा प्रशासन ऐसी इमारतों के पुनर्निर्माण की अनुमति दे रहे हैं, इसलिए यह अनुमति यहां भी देनी चाहिए। मनपा का नगर रचना विभाग UDCPR के प्रावधानों की गलत व्याख्या कर रहा है, जिससे भवनों के पुनर्निर्माण में बाधा आ रही है। इस संबंध में आयुक्त को मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए।
 * ग्राम पंचायत काल के क्षेत्रफल को मान्यता: अक्टूबर 2024 में सरकार ने UDCPR क्रमांक 7.6 में संशोधन किया है कि यदि ग्राम पंचायत काल में किसी इमारत पर कर (मकान टैक्स) लगाया गया है तो उसमें उल्लेखित क्षेत्रफल ही मान्य किया जाना चाहिए। लेकिन मनपा में ग्राम पंचायत के सभी भवनों का अभिलेख उपलब्ध नहीं है, और सोसायटी में भी सभी फ्लैट धारकों के पास मकान टैक्स संबंधी पुराने साक्ष्य नहीं हैं। अतः, भवन के सम्पूर्ण क्षेत्रफल की माप को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इस पर मौजूदा भवन का क्षेत्र ही मान्य होना चाहिए। साथ ही, ग्राम पंचायत काल से कई भवन बने हैं, लेकिन उन पर संपत्ति का टैक्स नहीं लगाया गया है। 30 साल पहले के ऐसे भवनों के अन्य साक्ष्य मान्य होने चाहिए।
 * ठाणे मनपा के समान रियायतें: मीरा-भाईंदर शहर में पिछले दिनों खतरनाक पुरानी इमारतों के पुनर्विकास की अनुमति दी गई थी, लेकिन हाल ही में UDCPR और क्लस्टर योजना के कारण पुनर्विकास प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिल पा रही है। इसके कारण नागरिक बेघर हो गए हैं और कई खतरनाक इमारतों में रहने को मजबूर हैं, जिससे भविष्य में इमारत गिरने तथा बड़ी जनहानि होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए इमारतों के पुनर्विकास के लिए अनुमति दी जानी चाहिए। ठाणे महानगरपालिका क्षेत्र और मीरा-भाईंदर क्षेत्र में बनने वाली इमारतें एक जैसी हैं, लेकिन ठाणे महानगरपालिका क्षेत्र में खतरनाक इमारतों के पुनर्विकास को काफी रियायतें दी गई हैं, जिससे वहां खतरनाक इमारतों का पुनर्निर्माण आसानी से संभव है। इसी तरह, मीरा-भाईंदर महानगरपालिका क्षेत्र में खतरनाक इमारतों के लिए भी यही प्रस्ताव रखा जाना चाहिए।
इस ज्ञापन से स्पष्ट है कि विधायक मेहता और प्रभावित नागरिक मीरा-भाईंदर में क्लस्टर डेवलपमेंट योजना के वर्तमान स्वरूप से नाखुश हैं और इसमें तत्काल संशोधन की मांग कर रहे हैं। क्या मनपा आयुक्त इन मांगों पर विचार करेंगे, यह देखना बाकी है।

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