मानसून से निपटने को तैयार वसई-विरार मनपा का स्वास्थ्य विभाग: 200 से अधिक संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी
महामारी नियंत्रण, गप्पी मछली केंद्र और रैपिड रिस्पांस टीमें तैयार; जलजनित बीमारियों और आपदाओं से निपटने की व्यापक योजना
वसई: मानसून के आगमन के साथ ही वसई-विरार शहर में संभावित महामारियों और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए महानगरपालिका का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह कमर कस चुका है। शहर में 200 से अधिक संवेदनशील क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं, जहाँ मानसून के दौरान विभिन्न प्रकार की बीमारियों के फैलने की आशंका रहती है। इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी, गप्पी मछली केंद्रों की स्थापना और आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता पर जोर दिया जा रहा है।
जलजनित और कीटजनित बीमारियों से निपटने की तैयारी
मानसून के मौसम में पीलिया, टाइफाइड, लेप्टोस्पायरोसिस, डेंगू और मलेरिया जैसी जलजनित और कीटजनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त, सर्दी, खांसी और बुखार जैसे सामान्य रोग भी फैलते हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए, स्वास्थ्य विभाग शहर के सभी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपकेंद्रों पर स्वास्थ्यकर्मियों के साथ गहन समीक्षा बैठकें कर रहा है और उचित योजना बनाने के निर्देश दे रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी, नगर निगम, डॉ. भक्ति चौधरी ने बताया, "स्वास्थ्य विभाग ने महामारी रोगों के प्रसार को लेकर जन जागरूकता, जांच और उपचार जैसी सभी चीजों की योजना बनाई है।"
आपदा प्रबंधन और दवाओं का पर्याप्त स्टॉक
मानसून के दौरान चक्रवात, भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक एवं मानव निर्मित आपदाओं की संभावना अधिक होती है। पिछले साल भी शहर में बाढ़ जैसी स्थिति बनी थी। ऐसी आपदाओं के दौरान त्वरित सेवाएं प्रदान करने के लिए रैपिड रिस्पांस टीमें को पूरी तरह तैयार रखा गया है।
महानगरपालिका के चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग ने आश्वस्त किया है कि अस्पतालों में दवाओं, एंटी-बैक्टीरियल गोली किट, बेड, एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक सुविधाओं का पर्याप्त स्टॉक तैयार रखा जाएगा। विशेष रूप से, कुत्ते के काटने से बचाव के लिए 7,000 टीके और सांप व बिच्छू के काटने से बचाव के लिए 1,000 टीके का स्टॉक उपलब्ध है। स्वास्थ्य विभाग नागरिकों में मानसून संबंधी बीमारियों के बारे में जागरूकता पैदा करने का काम भी कर रहा है।
संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान और गप्पी मछली अभियान
वसई-विरार का एक बड़ा हिस्सा घनी आबादी वाला है, जहाँ अक्सर सीवेज का पानी सड़कों पर भर जाता है या पानी की पाइपें कई दिनों तक भरी रहती हैं। पिछले तीन सालों में ऐसे इलाकों में मलेरिया और डेंगू के अधिक मामले सामने आए हैं। इन क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित किया गया है और उन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। फिलहाल ऐसे 200 इलाके हैं जहाँ स्वास्थ्य टीमें निरंतर निरीक्षण कर रही हैं। खास तौर पर, निर्माण स्थलों पर रहने वाले मजदूरों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है और उन जगहों पर जमा पानी को रोकने के उपाय किए जा रहे हैं, जो मच्छरों के पनपने का मुख्य स्रोत होते हैं।
मच्छरों के लार्वा को नियंत्रित करने और महामारी को फैलने से रोकने के लिए वसई-विरार क्षेत्र में लगभग 50 स्थानों पर गप्पी मछली केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनमें बड़े तालाब और झीलें शामिल हैं। ये गप्पी मछलियाँ मच्छरों के लार्वा को खाकर उनकी संख्या को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। मनपा का स्वास्थ्य विभाग मानसून के मौसम के अनुरूप सभी आवश्यक कदम उठा रहा है ताकि नागरिकों को सुरक्षित और स्वस्थ रखा जा सके।
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