फर्रुखाबाद में प्रधान के निलंबन पर सांसद-विधायक आमने-सामने, दोबारा जांच के निर्देश

फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश: फर्रुखाबाद में एक ग्राम प्रधान के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर जिले के सांसद और विधायक आमने-सामने आ गए हैं, जिससे स्थानीय राजनीति गरमा गई है। विधायक की शिकायत पर ग्राम प्रधान के अधिकार निलंबित कर दिए गए हैं, जबकि सांसद ने इस मामले में दोबारा निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ग्राम प्रधान पर आरोप लगाए गए हैं, अभी तक वे सिद्ध नहीं हुए हैं।
विधायक की शिकायत पर हुई कार्रवाई
पूरा मामला विकास खंड कायमगंज की ग्राम पंचायत बिल्हा से जुड़ा है। कायमगंज की विधायक डॉ. सुरभि की शिकायत पर हुई प्रारंभिक जांच में वित्तीय अनियमितताएं पाई गईं। इसके आधार पर, जिलाधिकारी ने 30 अप्रैल को ग्राम प्रधान बिल्हा, अरविंद कुमार के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए थे। विधायक ने केवल अधिकार सीज करने को अपर्याप्त बताते हुए, ग्राम प्रधान और अन्य दोषी पाए गए व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की है। उनका तर्क है कि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करने वालों को कानूनी सजा मिलनी चाहिए।
सांसद ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
वहीं, इस कार्रवाई के बाद फर्रुखाबाद के सांसद मुकेश राजपूत ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर ग्राम प्रधान का पक्ष लिया है। सांसद ने अपने पत्र में कहा है कि विकास के हित में इस मामले की एक बार फिर किसी सक्षम और निष्पक्ष उच्चाधिकारी से जांच कराई जाए, और उसके बाद ही नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

करोड़ों के कार्यों में अनियमितता का आरोप
जिला पंचायत राज अधिकारी, राजेश चौरसिया के अनुसार, पंचायतीराज अधिनियम के तहत प्राथमिक जांच के बाद उच्च स्तरीय जांच फिर से कराई जाती है। इसके लिए जिलाधिकारी की ओर से एक जांच समिति गठित कर दी गई है। इस जांच रिपोर्ट के बाद ही प्रधान की बर्खास्तगी या बहाली पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि बर्खास्तगी होती है, तभी एफआईआर कराई जा सकती है।
यह मामला विधायक डॉ. सुरभि की दो साल पुरानी शिकायत से संबंधित है। जांच समिति ने पाया था कि वर्ष 2019-20 से 2022-23 के बीच ग्राम पंचायत बिल्हा में मनरेगा और पंचायत निधि से कराए गए कुल ₹6.29 करोड़ के कार्यों में अनियमितताएं की गईं। समिति की रिपोर्ट में ₹66.72 लाख की मनरेगा मद और ₹17.08 लाख की पंचायत निधि मद से हुए भुगतानों को "अपव्ययी और अमानक कार्य" बताया गया। इस मामले में ग्राम प्रधान अरविंद कुमार सहित पूर्व प्रधान, तीन पंचायत सचिवों और एक अवर अभियंता को जिम्मेदार ठहराया गया है। जिलाधिकारी के आदेश पर ग्राम प्रधान से ₹3,08,599.50 की वसूली भी तय की गई है।

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