वसई-विरार में आरक्षित भूखंडों पर अवैध औद्योगिक गालों का साम्राज्य: मनपा की चुप्पी से जनता आक्रोशित

आरक्षित भूमि पर अवैध निर्माण का बढ़ता जाल
वसई-विरार शहर में अवैध निर्माण एक विकराल रूप लेता जा रहा है, खासकर वालीव प्रभाग के सातीवली क्षेत्र में। यहां, उद्यान (गार्डन) और गुरुचरण जैसे सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित भूखंडों पर बड़े पैमाने पर अवैध औद्योगिक गालों का निर्माण कर लिया गया है. बताया जा रहा है कि अब तक लगभग 60 से 70 ऐसे औद्योगिक गाले अवैध रूप से बन चुके हैं. इन आरक्षित भूखंडों पर हो रहे धड़ल्ले से अवैध निर्माणों पर वसई-विरार महानगरपालिका (मनपा) की संदिग्ध चुप्पी स्थानीय जनता में भारी असंतोष पैदा कर रही है.
प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप और जनता की गुहार
स्थानीय निवासियों का दावा है कि उन्होंने इस अवैध गतिविधि की जानकारी बार-बार मनपा प्रशासन को दी है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. अधिकारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि संबंधित भूमि राजस्व विभाग के क्षेत्राधिकार में आती है. हालांकि, यह बात चौंकाने वाली है कि इसी स्थान पर पिछले दो वर्षों में मनपा प्रशासन पांच बार तोड़फोड़ की कार्रवाई कर चुका है, जो यह स्पष्ट करता है कि यह क्षेत्र पहले से ही मनपा की सीमा में था.
जनता अब सवाल उठा रही है कि यदि यह भूमि पहले मनपा के अधीन थी, तो अचानक यह राजस्व विभाग को कैसे हस्तांतरित हो गई, या क्या लोगों को जानबूझकर गुमराह किया जा रहा है? यह बदलाव कैसे और किसके आदेश पर हुआ, यह प्रश्न जनमानस को परेशान कर रहा है. ऐसे में यह संदेह गहराता जा रहा है कि कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी संख्या में अवैध निर्माण संभव नहीं है.

उच्च-स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
महापालिका प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों की इस मुद्दे पर चुप्पी इस बात का प्रमाण है कि कहीं न कहीं पूरी व्यवस्था ही इस अवैध गतिविधि में संलिप्त है. आरोप है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण में कनिष्ठ अधिकारी खुलेआम निर्माणकर्ताओं को छूट दे रहे हैं. ऐसे में जनता की पुरजोर मांग है कि मनपा आयुक्त इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें. संबंधित अधिकारियों की भूमिका की उच्च-स्तरीय जांच करवाई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो. यदि प्रशासन ने समय रहते इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया, तो यह प्रकरण भविष्य में शहर के अन्य हिस्सों के लिए भी एक गलत मिसाल बन जाएगा, जिससे वसई-विरार जैसे बड़े शहर का नियोजन और पर्यावरणीय संतुलन गंभीर खतरे में पड़ सकता है.

सार्वजनिक सुविधाओं का हनन और नैतिक पतन
सातीवली में साई रेसिडेंसी और हुंडई शोरूम के पास हुए ये अवैध निर्माण उन भूखंडों पर हुए हैं जो सार्वजनिक उपयोग, जैसे कि उद्यान और गुरुचरण के लिए आरक्षित थे. इस प्रकार का निर्माण न केवल नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि जनता के अधिकारों पर भी सीधा हमला है. शहर में पहले से ही जल आपूर्ति, सड़क, स्वच्छता और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है, और इन मुद्दों पर प्रशासन की कार्यशैली पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं. ऐसे में, आरक्षित जमीन पर निजी लाभ के लिए अवैध निर्माण का होना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि नैतिक रूप से भी घोर निंदनीय है.

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