ठाणे में गैरकानूनी जमावड़ा: निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने पर सौ से अधिक व्यक्तियों पर कानूनी शिकंजा

ठाणे जिले में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 100 से अधिक व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही शुरू की है। इन व्यक्तियों पर आरोप है कि इन्होंने लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए बिना आधिकारिक अनुमति के एक मानव श्रृंखला विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। पुलिस के एक उच्चाधिकारी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यह प्रदर्शन 16 मई को दोपहर के समय हुआ, जबकि महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के अंतर्गत क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू थी।
अवैध प्रदर्शन और कानून का उल्लंघन
प्राप्त सूचना के अनुसार, इस विरोध प्रदर्शन में तकरीबन सौ से अधिक लोगों ने शिरकत की, जिसके कारण यातायात व्यवस्था बाधित हुई और प्रभावी निषेधाज्ञा का प्रत्यक्ष उल्लंघन हुआ। एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के प्रदर्शन के लिए किसी भी प्रकार की पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने आगे कहा कि आयोजकों ने इस गैरकानूनी कृत्य को अंजाम देकर सार्वजनिक शांति और कानून व्यवस्था को भंग करने का प्रयास किया।
कानूनी कार्रवाई और संदिग्धों की पहचान
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कर ली है। अधिकारी ने यह भी जानकारी दी कि इस मामले में तीन आरोपियों की पहचान सुनिश्चित कर ली गई है और आगे की विधिक प्रक्रिया जारी है। खबरों के अनुसार, यह आंदोलन एक स्थानीय पत्रकार के विरुद्ध जारी किए गए निष्कासन आदेश के विरोध में आयोजित किया गया था।
नवी मुंबई: स्टॉकयार्ड में जबरन घुसपैठ और कर्मचारी पर हमला, तीन पर मामला दर्ज
एक अन्य घटनाक्रम में, नवी मुंबई पुलिस ने तीन व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी मामला दर्ज किया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने कथित तौर पर एक स्टॉकयार्ड में अनधिकृत रूप से प्रवेश किया और वहां कार्यरत एक कर्मचारी पर हमला किया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह घटना 16 मई की संध्याकाल में पनवेल के कोन गांव स्थित एक स्टॉकयार्ड में घटित हुई।
जबरन प्रवेश, मारपीट और धमकी
दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, कोन गांव के पूर्व सरपंच दीपक हेके और उनके सहयोगी कुणाल गायकवाड़ व जितेश कांबले बिना किसी अनुमति के जबरदस्ती स्टॉकयार्ड के परिसर में घुस गए। शिकायत में यह भी कहा गया है कि इन तीनों ने वहां के प्रभारी राजूभाई पटेल को एक अज्ञात दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव डाला।
पीड़ित राजूभाई पटेल ने अपनी शिकायत में यह गंभीर आरोप लगाया है कि जब उन्होंने मराठी भाषा में लिखे दस्तावेज को पढ़ने में असमर्थता जताते हुए हस्ताक्षर करने से इनकार किया, तो उक्त तीनों व्यक्तियों ने कथित तौर पर उन्हें थप्पड़ और मुक्के मारे और जान से मारने की धमकी भी दी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस संदर्भ में भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कर ली गई है, हालांकि अभी तक किसी भी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। पुलिस मामले की गहन छानबीन कर रही है।

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