पालघर में बेमौसम बारिश का कहर: हजारों प्रभावित, करोड़ों का नुकसान

पालघर, महाराष्ट्र: मई के शुरुआती दिनों में हुई अप्रत्याशित बेमौसम बारिश ने महाराष्ट्र के पालघर जिले में भारी तबाही मचाई है, जिससे हजारों किसान और मछुआरे प्रभावित हुए हैं। इस प्राकृतिक आपदा के कारण व्यापक स्तर पर कृषि भूमि और मत्स्य संपदा को क्षति पहुंची है, जिसके आकलन के बाद जिला प्रशासन ने राज्य सरकार से महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता की मांग की है।

कृषि क्षेत्र को भारी आघात
6 और 7 मई को हुई इस विनाशकारी बारिश ने पालघर के कृषि परिदृश्य पर गहरा असर डाला है। जिला प्रशासन की विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, 1,923 किसानों की लगभग 537.68 हेक्टेयर भूमि पर खड़ी फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं। इसके अतिरिक्त, 5,598 किसानों के 2,162.79 हेक्टेयर फलदार वृक्षों को भी गंभीर क्षति पहुंची है। इस व्यापक नुकसान की भरपाई के लिए राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) से ₹9.23 करोड़ की तत्काल सहायता का प्रस्ताव भेजा गया है। यह राशि किसानों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी जो अपनी आजीविका के लिए इन फसलों पर निर्भर थे।
आवासीय संरचनाओं को भी नुकसान
बारिश का कहर केवल कृषि तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने ग्रामीण आवासीय संरचनाओं को भी खासा प्रभावित किया है। रिपोर्ट बताती है कि 2,124 मकान और 4 झोपड़ियां पूरी तरह से ध्वस्त हो गई हैं, जबकि 2,120 मकानों को आंशिक रूप से क्षति पहुंची है। इन आवासीय क्षतियों के लिए ₹1.2 करोड़ की सहायता राशि का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है, ताकि प्रभावित परिवारों को पुनर्वास में मदद मिल सके।

मत्स्य उद्योग पर संकट
समुद्री क्षेत्र भी इस बेमौसम बारिश से अछूता नहीं रहा। स्थानीय मछुआरों को भी भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन के आकलन के अनुसार, 99 नौकाएं आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुई हैं, वहीं 2 नौकाएं पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं। इस नुकसान की भरपाई के लिए SDRF से ₹6.32 लाख की सहायता का अनुरोध किया गया है। मछुआरों के लिए उनकी नौकाएं ही उनकी आय का मुख्य साधन होती हैं, और यह क्षति उनकी आजीविका पर सीधा प्रहार है।

प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया और आगामी कदम
आपदा की गंभीरता को देखते हुए, पालघर जिला प्रशासन ने अत्यंत तत्परता दिखाते हुए क्षति का त्वरित सर्वेक्षण किया है। विभिन्न क्षेत्रों में हुए नुकसान का विस्तृत आकलन कर, राज्य सरकार को राहत पैकेज के लिए प्रस्ताव भेज दिए गए हैं। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं कि SDRF के तहत इन प्रस्तावों को कब तक मंजूरी मिलती है, ताकि प्रभावितों को जल्द से जल्द राहत मिल सके और वे अपने जीवन को फिर से पटरी पर ला सकें।

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