यूपी: NMC बिल के विरोध में हड़ताल पर प्रयागराज के डॉक्टर, स्वास्थ्य सेवाएं ठप
नेशनल मेडिकल कमीशन बिल के विरोध में आज बुधवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने 24 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया है. इस दौरान ओपीडी सर्विस बंद रहेंगी हालंकि इमरजेंसी कैजुलटी और ऑपरेशन सर्विस जारी रहेंगी. हड़ताल आज बुधवार सुबह 6 बजे से गुरुवार सुबह 6 बजे तक जारी रहेगी.
प्रयागराज: नेशनल मेडिकल कमीशन विधेयक 2019 लागू किए जाने के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की अपील देश भर के डॉक्टर आज हड़ताल पर चले गए हैं. बिल के विरोध में प्रयागराज के मोती लाल नेहरु मेडिकल कालेज से सम्बद्ध स्वरुप रानी अस्पताल के भी चार सौ से पांच सौ रेजीडेंट डॉक्टरों ने कार्यबहिष्कार शुरु कर दिया है.
अस्पताल के जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर अस्पताल की दूसरी सभी सेवायें ठप कर दी हैं और पंजीकरण बिल्डिंग के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। बिल का विरोध कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने एनएमसी बिल को चिकित्सा के क्षेत्र के लिए घातक बताया है.
हड़ताली जूनियर डॉक्टरों के मुताबिक बिल के सेक्शन 32 में करीब साढ़े तीन लाख अयोग्य नॉन मेडिकल या झोलाछाप को मॉर्डन पद्धति से प्रैक्टिस करने की अनुमति दी जा रही है। इसके साथ ही बिल में आईएमए की मांगों को भी शामिल नहीं किया गया है. इस कमेटी में ज्यादातर नौकरशाह और राजनेताओं को नामित किया जा रहा है.
कमेटी में नौ लोग ही चुने हुए जाएंगे. इस वजह से चिकित्सा सेवा से पहले चिकित्सा शिक्षा पर इसका असर पड़ना तय है. डॉक्टरों की बिल के विरोध में हुई हड़ताल गुरुवार सुबह छह बजे तक चलेगी. डॉक्टरों की हड़ताल में निजी अस्पताल, क्लीनिक, पैथोलॉजी और डॉयग्नोस्टिक सेंटर भी शामिल हैं. जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों, क्लीनिक में भी सामान्य इलाज नहीं मिल सकेगा.
प्रयागराज: नेशनल मेडिकल कमीशन विधेयक 2019 लागू किए जाने के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की अपील देश भर के डॉक्टर आज हड़ताल पर चले गए हैं. बिल के विरोध में प्रयागराज के मोती लाल नेहरु मेडिकल कालेज से सम्बद्ध स्वरुप रानी अस्पताल के भी चार सौ से पांच सौ रेजीडेंट डॉक्टरों ने कार्यबहिष्कार शुरु कर दिया है.
अस्पताल के जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर अस्पताल की दूसरी सभी सेवायें ठप कर दी हैं और पंजीकरण बिल्डिंग के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। बिल का विरोध कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने एनएमसी बिल को चिकित्सा के क्षेत्र के लिए घातक बताया है.
हड़ताली जूनियर डॉक्टरों के मुताबिक बिल के सेक्शन 32 में करीब साढ़े तीन लाख अयोग्य नॉन मेडिकल या झोलाछाप को मॉर्डन पद्धति से प्रैक्टिस करने की अनुमति दी जा रही है। इसके साथ ही बिल में आईएमए की मांगों को भी शामिल नहीं किया गया है. इस कमेटी में ज्यादातर नौकरशाह और राजनेताओं को नामित किया जा रहा है.
कमेटी में नौ लोग ही चुने हुए जाएंगे. इस वजह से चिकित्सा सेवा से पहले चिकित्सा शिक्षा पर इसका असर पड़ना तय है. डॉक्टरों की बिल के विरोध में हुई हड़ताल गुरुवार सुबह छह बजे तक चलेगी. डॉक्टरों की हड़ताल में निजी अस्पताल, क्लीनिक, पैथोलॉजी और डॉयग्नोस्टिक सेंटर भी शामिल हैं. जिससे मरीजों को निजी अस्पतालों, क्लीनिक में भी सामान्य इलाज नहीं मिल सकेगा.

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