सहस्त्रचंडी महायज्ञ दिवस फिर भी ज्ञानपुर कैसे पहूंचे बाहूबली विधायक.!

सुनील तिवारी..✒️
लखनऊ – भदोही जनपद में घटित अक्षम्य घटना ने शुक्रवार को सिर्फ भदोही-पूर्वांचल की ‘जन्मभूमि’ ही नहीं बल्कि ‘कर्मभूमि’ मैट्रो सीटी शहरो में बसे जनमानस को भी झकझोर दिया। अधिकांश जनमानस के दिलो-दिमाग में घटना उपरांत यह सवाल कौतुहल मचा रहा है कि ‘काशी-प्रयाग मध्य’ बसे भदोही जनपद में अपराधियों के हौसले बुलंदी पर हैं। इससे भी बड़ा सवाल तब उठता है जब ‘बाहूबली विधायक’ उपाधि प्राप्त ज्ञानपुरिया मुखिया विजय मिश्रा के क्षेत्र में भी सेंध लगनी शुरू हो जाय। 
गौरतलब है कि ‘बाहूबली’ विधायक खुद भी स्वयं को ‘जनबली’ मानते हैं और कहते हैं कि उनके पास जनबल है। घटना मंथनकार जनमानस के हृदय एक सवाल हिलोर रहा है कि यदि भदोही जनपद का हाईटेक शासन-प्रशासन असक्षम भी है तो विधायक एवम् सांसद यांनी की जनप्रतिनिधि ही मौनव्रतम जिम्मेदार हैं। आखिरकार दौड़ तो लगानी ही पड़ेगी, भले दुखद क्षणीय चिंगारी उठते ही या दुखियों का आक्रोश तांडव अन्य पर भी बरसनें के बाद। कुछ ऐसा ही हुआ शुक्रवार की सुबह और अचानक जब भदोही हत्याकांड घटना की जानकारी ज्ञानपुरिया मुखिया विजय मिश्रा के पास पहुंची…तो किसी के माथे का सिंदूर उजड़ चुका था, कोई बेटा गोली से घायल अस्पताल में और बेटी की डोली उठने से पहले बाबूल की अर्थी…। ऐसे में दिल-दहलना लाजिमी है और धार्मिक आस्था केंद्र में बैठे हों तो दैवीय शास्तार्थ विश्वासघाती हमलावर नरपिचाशों के प्रति विशेष आक्रोश पैठ करता है।
चक्काजाम खुला, मुखिया दिलायेगें न्याय..
भदोही मुख्य मार्ग पर आक्रोशित जनमानस ने शासन-प्रशासन के प्रति आक्रोश दर्शाते हुये रविंद्रपति तिवारी (पप्पू) के शव को लेकर चक्काजाम कर रखा था, जहां मौके पर उपस्थित ज्ञानपुर एसडीएम साहिबा, आलाधिकारी एएसपी डॉ. संजय कुमार और ज्ञानपुर सीओ पहुंचकर प्रदर्शनकारियों एवम् परिजनों को समझाने हेतु प्रयासरत थे। दुखद क्षण में आक्रोश की चिंगारी बढ़ रही थी और उसी समय ‘जनबली’ ज्ञानपुरिया मुखिया विजय मिश्रा ने पहुंचकर पीड़ित परिवार सहित गांव वालों से सांत्वनापूर्ण आग्रह से चक्काजाम खुलवाया। इस दौरान पीड़ित परिवार को पूर्ण मदद के साथ न्याय दिलवानें का आश्वासन दिया। ज्ञानपुर मुखिया विजय मिश्रा ने इस दर्दनाक मामले को राज्य के मुखिया योगी आदित्यनाथ के समक्ष भी न्याय-मदद हेतु रखने
का आत्ममंथन किया है।

मानवतावादी जिम्मेदारी, महायज्ञ का यथार्थ ज्ञान.!
वैदिक आचार्य पं. वेदप्रकाश शास्त्री कहते हैं कि मानवतावादी कार्य की जिम्मेदारी भी दैवीय शक्तियों से ही मिलती है और इसे कर्मठता पूर्ण निर्वाह करना ही महायज्ञ का यथार्थ ज्ञान है। ऐसे में उन्होंने यजमान के मन में उठती पीड़ा को मँइया शरणागत रखते हुये उन्हें क्षणिक मुक्त किया। एक पीड़ित परिवार के साथ दुखद क्षण में खड़े होकर जनमानस का पारिवारिक मुखिया बतौर आंसू पोछना और न्याय दिलवानें हेतु प्रयासरत होना यथार्थ सबसे बड़ा धर्म एवम् फर्ज है।

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