आजमगढ़ और मऊ के एक दरोगा, छह सिपाही को अनिवार्य सेवानिवृत्ति, एसपी ने बताई ये वजह
उत्तर प्रदेश में पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्रशासन सख्त हो गया है। जहां एक तरफ वाराणसी में तीन दरोगा समेत 22 सिपाहियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए नोटिस जारी हुई है। वहीं, दूसरी तरफ आजमगढ़ और मऊ जिले में तैनात एक दरोगा, एक हेडकांस्टेबल और पांच कांस्टेबलों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई।
जिन पुलिस वालों की सेवा समाप्त की गई है, उनमें मऊ जिले में तैनात दरोगा विष्णु कुमार और मऊ के आरक्षी विनोद कुमार गौतम हैं। इसके अलावा आजमगढ़ जिले के हेडकांस्टेबल जितेंद्र कुमार, कांस्टेबल अल्फ्रेंड बसंत, विनोद कुमार शुक्ला, देवनरायण कन्नौजिया और सरवर हुसैन खां शामिल है।
आजमगढ़ जिले के जिन हेड कांस्टेबल और कांस्टबलों पर कार्रवाई हुई है, उसमें तीन पुलिस लाइन में तैनात थे। एक कंधरापुर और दूसरा रानी की सराय थाने पर तैनात था। एसपी आजमगढ़ त्रिवेणी सिंह और एसपी मऊ अनुराग आर्या की तरफ से भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक इन पुलिस वालों की आम शोहरत ठीक नहीं है।
इनमें से कुछ लोगों की अपराधियों से सांठगांठ पाई गई, जबकि कई का ध्यान ड्यूटी पर नहीं था। आरोप है कि ये शराब पीकर हंगामा करते थे। इनके क्रियाकलाप से क्षेत्र की जनता परेशान थी और विभाग को भी शर्मिंदा होना पड़ता था। बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद भी ये लोग अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं कर सके थे। ऐसे में इन लोगों की अब विभाग में कोई आवश्यकता नहीं है। तीन माह तक इन्हें वेतन भत्ता आदि देय होगा।
आजमगढ़ परिक्षेत्र के डीआईजी मनोज तिवारी ने कहा कि आजमगढ़, मऊ के एक दरोगा, एक हेडकांस्टेबल और पांच कांस्टेबलों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। इसकी सूचना डीजीपी के अलावा अपर पुलिस महानिदेशक स्थापना लखनऊ सहित अन्य को भेज दी गई है।

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