भदोही के सीतामढ़ी में ही लवकुश ने हनुमान जी को बनाया था बंधक
काशी प्रयाग और विन्ध्य की संगमस्थली के रूप में विख्यात महर्षि बाल्मीकि की तपोस्थली, लव कुश कुमारों की जन्म स्थली और जगत जजनी माँ जानकी की समाहित स्थली सीतामढ़ी में अश्वमेध यज्ञ के दौरान लव कुश कुमारों ने रामभक्त हनुमान को बंधक बना लिया था।
जिसका उल्लेख गोस्वामी तुलसीदास अपने विनय पत्रिका में व वाल्मीकि रामायण में भी इसका उल्लेख किया है। इतना ही नहीं, लव कुश कुमारों के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले नवमी मेलें में स्वयं इंद्रदेव हाजिरी लगाने आते हैं।
हजारों वर्ष पुराने इसी वट वृक्ष और सीतामढ़ी के अगल बगल के दो गांवों दिगपुर (डीघ) और बारीपुर की चर्चा गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपनी रचना कवितावली में लिखा है। जहां बाल्मीकि भए व्याध ते मुनींद्र साधु, मरा मरा जब सुन ऋषि सात की, सिय को निवास लव कुश को जन्म स्थलु, तुलसी छूअत ताप गरे गातकी, विटप महीप सुर सरित समीप सोहे सीता वट पेखत पुनीत होत पातकी, बारीपुर-दिगपुर बीच बिलसति भूमि, अंकित जो जानकी चरण जल जात की।
कवितावली की इन पंक्तियों से सीतामढ़ी की प्रमाणिकता का वर्णन गोस्वामी तुलसीदास जी ने किया है। आज भी गंगा तट के किनारे हजारो वर्ष पुराना सीतावट मौजूद है। सीतामढ़ी के एक तरफ बारीपुर तो दूसरी तरफ दिगपुर गांव मौजूद है। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक और वरिष्ठ साहित्यकार डा.राज कुमार पाठक ने बताया कि देश में दो सीतामढ़ी हैं। एक बिहार में, जहां सीता का घड़े से प्राकट्य हुआ था और दूसरी सीतामढ़ी यूपी के भदोही जिले में, जहां सीता वनवास काल के बाद धरा में समायी थी।
बताया कि गोस्वामी तुलसी दास जी इस सीतामढ़ी में तीन दिनों तक रूके भी थे और यहां की भौगोलिक स्थिति का वर्णन अपनी रचना कवितावली में किया है। बताया कि यहां अष्टमी की रात में लव कुश का जन्म हुआ था, जिसके उपलक्ष्य में आषाढ़ की नवमी पर यहां नवमी मेला लगता है, जिसमें इंद्रदेव बारिश कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। यह प्रमाणित इतिहास रहा है कि भयंकर सूखे के हालात में भी यहां बारिश हुई है। इस वर्ष 10 जुलाई को नवमी मेले का आयोजन होने जा रहा है।
बड़ी बात यह है सीतामढ़ी का हजारों वर्ष पुराना वट वृक्ष आज भी इसका साक्षी है। दूसरी तरफ विकास के नजरिए से इस इलाके पर गौर किया जाए तो यहां गंगा की जल धाराओं के बीच सीता समाहित मंदिर है और देश की सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमा (108 फीट) की भदोही में ही है, लेकिन यहां लाखों पर्यटकों की आवाजाही के बाद सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। सीता समाहित स्थल ट्रस्ट से प्रबंधक कैलाश चंद्र बताते है कि सीतामढ़ी में प्रतिदिन पंद्रह से बीस हजार की संख्या में सैलानियों की आवाजाही होती है,
लेकिन यहां यात्रियों के लिए टीनशेड, पर्याप्त शौचालय तक का अभाव है, जबकि देश में आज स्वच्छ भारत अभियान चलाया जा रहा है। स्वामी हरिहरानंद महराज का कहना है कि सीतामढ़ी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की योजना रामायण सर्किट से भी जोड़ा जाना चाहिए। नौ दिवसीय राष्ट्रीय रामायण मेले के महामंत्री मुन्ना पांडेय कहते है कि मोदी और योगी राज मे अयोध्या जगमग हो उठा है, लेकिन जगत जननी जानकी की समाहित स्थली सीतामढ़ी उपेक्षित है।

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